अमेरिका से होने वाली फाइनल वार्ता से पहले ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने डील की शर्त बता दी

अमेरिका से होने वाली फाइनल वार्ता से पहले ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने डील की शर्त बता दी अमेरिका से होने वाली फाइनल वार्ता से पहले ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने डील की शर्त बता दी

पाकिस्तान में आज अमेरिका और ईरान के बीच फाइनल युद्धविराम को लेकर बातचीत होनी है. पाकिस्तान इसे अपनी अग्निपरीक्षा के तौर पर ले रहा है. स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है. पूरे इस्लामाबाद को जेल की तरह सुरक्षित करने का दावा किया जा रहा है. लेबनान पर इजरायल के हमलों के कारण बात पटरी से उतरती दिख रही थी, लेकिन फिर इजरायल के लेबनान से बात करने के लिए तैयार होने के ऐलान ने अमेरिका-ईरान की पाकिस्तान वार्ता को लेकर उम्मीदें बढ़ा दीं. मगर अब ईरान के सुप्रीम लीडर ने जो बयान जारी किया है, उससे साफ है कि ये वार्ता किस तरफ जाएगी और युद्धविराम का रोडमैप कैसा होगा?

कैसा युद्धविराम चाहते हैं  मुज्तबा खामेनेई

ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने आज बयान जारी किया कि लोगों की सड़कों पर मौजूदगी पिछले चालीस दिनों की तरह जारी रहनी चाहिए. ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने अधिकार नहीं छोड़ेगा. तीसरे पवित्र प्रतिरोध में अब तक पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा जा सकता है कि आप (जनता) मैदान के असली विजेता रहे हैं.

ईरान के दक्षिणी पड़ोसियों से कहता हूं — आप एक चमत्कार देख रहे हैं. इसे ध्यान से देखें, अच्छी तरह समझें, सही राह पर खड़े रहें और शैतानी ताकतों के झूठे वादों से बचें. हम अभी भी आपसे भाईचारे और सद्भावना की उचित प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं — लेकिन यह तभी होगा, जब आप उन घमंडी ताकतों का साथ छोड़ेंगे, जो आपको अपमानित और शोषित करने का कोई मौका नहीं चूकतीं.

यह सब जान लें — हमारे देश पर हमला करने वाले आपराधिक हमलावरों को बिना सजा के नहीं जाने दिया जाएगा.

शहीदों के खून का, इस युद्ध के घायलों का और आप पर हुई हर तकलीफ का हिसाब लिया जाएगा. हम होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम करेंगे.

हमने युद्ध नहीं चाहा और न चाहेंगे — लेकिन अपने वैध अधिकारों से किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे. इस मामले में हम पूरे प्रतिरोध मोर्चे को एक इकाई मानते हैं.

अमेरिका और ईरान में किन बातों पर बन सकती है सहमति

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान परमाणु हथियार बनाने की जिद छोड़ सकता है, मगर वो मिसाइल और सेना पर कोई समझौता नहीं करेगा. इसके साथ ही वो लेबनान, हिज्बुल्लाह और हूतियों को लेकर भी कोई समझौता नहीं करेगा. अमेरिका को इसके बदले होर्मुज में टैक्स वसूलने के काम में पार्टनरशिप ईरान की तरफ से मिल सकती है. इस तरह से दोनों लंबे समय तक होर्मुज को कमाई का अड्डा बना सकते हैं. ईरान इसके बदले अमेरिका से सभी प्रतिबंधों को हटाने की मांग करेगा. बदले में ईरान को अपने परमाणु संवर्धन की नियमित जांच का आश्वासन अमेरिका को देना पड़ेगा. हालांकि, ये अटकलें हैं, देखना ये है कि किन शर्तों पर दोनों देश युद्धविराम के लिए राजी होते हैं. कारण दोनों में से कोई भी खुद को हारा हुआ नहीं दिखना चाहता.

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