भारत के रिटेल क्रेडिट बाजार में गोल्ड लोन सबसे बड़ा सेगमेंट बनकर उभरा है. मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल लोन वॉल्यूम (मात्रा) में इसकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और वैल्यू (मूल्य) के हिसाब से करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके पीछे मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें और लोगों का सुरक्षित लोन की ओर बढ़ता रुझान है.
ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों में गोल्ड लोन की औसत राशि में काफी बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर 2025 तिमाही में औसत गोल्ड लोन करीब 1.9 लाख रुपए तक पहुंच गया, जो इस सेगमेंट में तेजी को दिखाता है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर (सीएमआई), जो क्रेडिट मार्केट की स्थिति को दर्शाता है, दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 102 हो गया. यह एक साल पहले 97 और सितंबर तिमाही में 100 था. यानी लगातार तीसरी तिमाही में इसमें सुधार देखा गया है.
सोने की ऊंची कीमतों ने लोगों को अपने पास मौजूद गोल्ड का उपयोग करके लोन लेने के लिए प्रेरित किया है, जिससे गोल्ड लोन की मांग और वितरण दोनों में तेज वृद्धि हुई है.
पहले गोल्ड लोन का दबदबा दक्षिण भारत में ज्यादा था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे उत्तर और पश्चिम राज्यों में भी इसकी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है.
इस सेगमेंट में अब अलग-अलग तरह के ग्राहक भी जुड़ रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा लोन प्राइम और उससे ऊपर की कैटेगरी के ग्राहकों द्वारा लिए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि गोल्ड लोन अब एक मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बनता जा रहा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि त्योहारों के बाद और जीएसटी से जुड़े प्रभाव के बाद क्रेडिट सप्लाई में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन यह मौसमी वजहों से है, न कि किसी स्थायी गिरावट का संकेत.
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क्रेडिट की मांग खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में मजबूत बनी हुई है. नॉन-मेट्रो क्षेत्रों का कुल उधारकर्ताओं में हिस्सा बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है.
इस बीच, ऑटो लोन सेगमेंट में भी स्थिरता बनी हुई है. खासकर मिड-सेगमेंट वाहनों की मांग के चलते इसमें संतुलित ग्रोथ देखी जा रही है और पिछले साल के मुकाबले सप्लाई में भी बढ़ोतरी हुई है.


