Kerala Assembly Elections: असम से लेकर केरल तक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं. केरल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और कन्नूर से लोकसभा सांसद के. सुधाकरन के तेवर पार्टी नेतृत्व के लिए नई मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सुधाकरन ने कांग्रेस आलाकमान को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि अगर उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला, तो वे कन्नूर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे.
Kerala Assembly Elections:केरल इलेक्शन में कांग्रेस की बढ़ी टेंशन
कन्नूर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं सुधाकरन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सुधाकरन कन्नूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं. वे पहले राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं. सूत्रों का कहना है कि सुधाकरन का मानना है कि कन्नूर सीट पर उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है और पार्टी को वहां से फायदा हो सकता है. हालांकि, उनके इस रुख से पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है.
सांसदों को विधानसभा चुनाव न लड़ाने का फैसला
के. सुधाकरन अकेले ऐसे सांसद नहीं हैं जो विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. उनके अलावा अडूर प्रकाश समेत कुछ अन्य कांग्रेस सांसद भी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं. लेकिन कांग्रेस ने केरल में किसी भी लोकसभा सांसद को विधानसभा चुनाव न लड़ाने का नीतिगत फैसला किया है. पार्टी आलाकमान का तर्क है कि यदि किसी एक सांसद को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया, तो दूसरे सांसदों को किस आधार पर रोका जाएगा. इसी नीति के तहत अब तक सांसदों की मांग वाली सीटों पर उम्मीदवारों के नाम रोक कर रखे गए हैं.
क्यों अहम हैं सुधाकरन
सुधाकरन केरल में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं और कन्नूर की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ रही है. अपने आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर सुधाकरन लंबे समय से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सीपीआई (एम) के खिलाफ मुखर आलोचक रहे हैं. उनका राजनीतिक करियर कई दशकों तक फैला हुआ है. वे चार बार विधायक रह चुके हैं. 2009 में उन्होंने कन्नूर से लोकसभा चुनाव जीता था। हालांकि 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2019 में उन्होंने वापसी की और 2024 में भी सीट बरकरार रखी. के. सुधाकरन का संभावित इस्तीफा केरल में कांग्रेस के लिए खासकर कन्नूर जैसे संवेदनशील इलाके में, बड़ा झटका माना जा रहा है.
असम में अलग रणनीति, केरल में उलझन
कांग्रेस की इस नीति पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि असम में पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई को विधानसभा चुनाव लड़वा रही है. ऐसे में केरल में सांसदों को टिकट न देने की रणनीति पर अंदरूनी विरोध के स्वर तेज हो सकते हैं.
बागी तेवर से नेतृत्व पर दबाव
सूत्रों के मुताबिक, के. सुधाकरन ने पार्टी नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि टिकट न मिलने की स्थिति में वे निर्दलीय चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे. कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और कद्दावर नेता के ऐसे बागी तेवर ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है.
असम से बीजेपी में गया कांग्रेस सांसद, बढ़ी आशंका
कांग्रेस की चिंताएं इसलिए भी बढ़ी हैं, क्योंकि एक दिन पहले ही असम के नौगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस और लोकसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया. ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहती कि केरल में किसी तरह का बड़ा राजनीतिक झटका लगे.
केरल में ‘करो या मरो’ की स्थिति
केरल कांग्रेस के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ जैसा माना जा रहा है. पिछले दस वर्षों से सीपीएम सत्ता में है और कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहती है. इसके लिए पार्टी को अंदरूनी मतभेद और नेतृत्व संकट पर जल्द काबू पाना होगा.
उम्मीदवारों की घोषणा जारी, कई सीटें अब भी खाली
9 अप्रैल को होने वाले केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अब तक 55 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है. करीब 40 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किसी भी वक्त किया जा सकता है. हालांकि, जिन सीटों पर सांसदों की दावेदारी है, वहां अब तक पार्टी ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं.
आलाकमान का फैसला बदलेगा या नहीं?
अब सवाल यह है कि सांसदों को विधानसभा चुनाव न लड़ाने को लेकर कांग्रेस आलाकमान अपने फैसले पर कायम रहता है या दबाव में कोई बदलाव करता है. के. सुधाकरन के संभावित निर्दलीय कदम से केरल कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है.
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