तेहरान:
ईरान से जारी जंग के बीच रविवार को अमेरिका ने तब बड़ी कामयाबी हासिल की, जब उसने दुश्मन की जमीन पर एक बेहद खतरनाक ऑपरेशन चलाकर अपने पायलट को सुरक्षित बचाया. यह मिशन बेहद जोखिम भरा था. क्योंकि शुक्रवार को फाइटर प्लेन F-15E के मार गिराए जाने के बाद लापता पायलट की तलाश ईरान भी कर रहा था. ईरान ने इस पायलट को खोजने वाले पर इनाम की घोषणा भी की थी. लिहाजा बड़ी संख्या में आम लोग भी अमेरिकी पायलट की तलाश में जुटे थे. ईरानी फौज तो थी ही. लेकिन अमेरिका ने अपने तमाम हाईटेक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए पायलट को बचाया. लेकिन अब इस पूरे ऑपेरशन से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है.
ईरान की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान अमेरिका का प्लान केवल पायलट को बचाना ही नहीं था, बल्कि अमेरिका ईरान से यूरेनियम की उठाना चाहता था. शायद इस कारण ही अमेरिका ने इस मिशन के दौरान 20 हजार KG वजन उठाने वाले विमान भेजे थे.
ईरान राजनायिक सेवा के प्रवक्ता ने जताई आशंका
ईरान से यूरेनियम चोरी के इस अमेरिकी प्लान पर ईरान के राजनयिक सेवा के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बयान दिया है. उन्होंने आशंका जताई कि इस्फ़हान प्रांत में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) की चोरी करना हो सकता था.
‘धोखे का अभियान’ होने की संभावना
ईरान की ओर से यह दावा किया गया है कि इस पूरे सैन्य ऑपरेशन के पीछे एक गहरी साजिश छिपी हो सकती है. इस्माइल बघाई ने एक सवाल के जवाब में कहा, “इस संभावना को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि यह संवर्धित यूरेनियम चोरी करने के लिए एक ‘डिसेप्शन ऑपरेशन’ (धोखे का अभियान) था. हालांकि, हकीकत यह है कि इस ऑपरेशन का परिणाम दूसरे पक्ष के लिए भारी विफलता के रूप में सामने आया है.”
बघाई ने इस सफलता का श्रेय आध्यात्मिक शक्ति और जनता के धैर्य को देते हुए कहा, “हमारा मानना है कि यह खुदा की रहमत थी, जिसने ईरानी राष्ट्र की मदद की. यह इस बात का प्रमाण है कि प्रतिरोध, दृढ़ता और रक्षा का परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है. यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए एक बड़ा अपमान और आपदा साबित हुआ है.”
अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे थे भारी लाव-लश्कर
ईरान में अमेरिकी फाइटर जेट के गिरने के बाद अमेरिका ने फिल्मी अंदाज में अपने पायलट को रेस्क्यू किया. फिर ट्रंप ने इस मिशन को साहसी ऑपरेशन तक बता दिया. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये वाकई सिर्फ एक बचाव अभियान थाया इसके पीछे कोई बड़ा और छुपा हुआ मकसद था? शक की सुई इसलिए इस ओर जा रही है क्योंकि जिस तरह के संसाधन इस मिशन में लगाए गए, वो एक पायलट के रेस्क्यू मिशन से कहीं ज्यादा लगते हैं.
इस ऑपरेशन में सिर्फ हेलीकॉप्टर ही नहीं थे, बल्कि ब्लैक हॉक, ए-10 थंडरबोल्ट, एफ-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर, निगरानी करने वाले विमान और सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सी-130 जैसे भारी-भरकम परिवहन विमान भी शामिल थे.ट्रंप ने तो खुद कहा है कि दर्जनों जहाज इस मिशन में लगे हुए थे.
कितने जहाज मिशन में तैनात किए गए थे?
• 4-6 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर
• 4-6 कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू एयरक्राफ्ट
• 12-20 फाइटर जेट्स
• 2-3 इंटेलिजेंस/सर्विलांस AWACS एयरक्राफ्ट
• 6-8 टैंकर विमान (हवा से हवा में तेल भरने के लिए)
यह भी पढ़ें – पायलट को बचाने के लिए अमेरिका ने क्यों भेजे 20 हजार KG वजन उठाने वाले विमान? सर्च ऑपरेशन या सीक्रेट मिशन


