ट्रंप ने शहबाज से पहले लिया मुनीर का नाम, तारीफ के पीछे छिपी है पाकिस्तान की ‘चापलूसी’ हकीकत

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ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता अभी तक बेनतीजा निकली. इस शांति वार्ता पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने शांति वार्ता कराने वाले पाकिस्तान का भी जिक्र किया. खास बात यह थी कि ट्रंप ने प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से पहले आर्मी चीफ आसिम मुनीर का नाम लिया. इस पूरी शांति वार्ता के दौरान भी आसिम मुनीर पीएम शहबाज से ज्यादा लाइम लाइट में रहा. आखिर ट्रंप के इस पोस्ट के क्या मायने हैं? आइए बताते हैं.

ट्रंप ने भी शहबाज को दरकिनार करते मुनीर की तारीफ की

शांति वार्ता के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर और शहबाज को ‘कुशल नेतृत्व’ वाला बताया. शांति वार्ता कराने के लिए पाकिस्तान की तारीफ भी की. लेकिन ट्रंप का यह सार्वजनिक महिमामंडन शहबाज सरकार की कमजोरी को जगजाहिर कर गया. ट्रंप का यह अंदाज न सिर्फ शहबाज शरीफ के लिए एक कूटनीतिक तमाचा है, बल्कि यह भी साफ करता है कि दुनिया की नजर में पाकिस्तान को कौन चलाता है.

बार-बार ट्रंप की तारीफ करते हैं मुनीर

ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि मुनीर और शहबाज भारत के साथ संभावित युद्ध को टालने के लिए बार-बार उनका शुक्रिया अदा करते हैं. यह बयान पाकिस्तान की उस लाचारी को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी सुरक्षा के लिए विदेशी ताकतों की बैसाखी पर टिका है. मुनीर का ट्रंप के सामने बार-बार आभार जताना यह बताता है कि पाकिस्तान की सेना, जो खुद को बहुत ताकतवर समझती है, असल में कितनी कमजोर और मदद की मोहताज है.

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क्या पाकिस्तान में मुनीर का कद शहबाज से ज्यादा?

शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं. वहीं आसिम मुनीर वहां की सेना का प्रमुख. मुनीर वही शख्स है, जिसपर भारत में पहलगाम आतंकी हमले की साजिश करने का आरोप है. ऐसे शख्स का कद पाकिस्तान में लगातार बढ़ता जा रहा है. मुनीर कहीं ना कहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी ज्यादा दिखाई देता है. ट्रंप के बयान में भी इसकी झलक दिखी. ट्रंप जैसे नेता जानते हैं कि पाकिस्तान में निवेश हो या सुरक्षा, बात शहबाज से नहीं बल्कि मुनीर से करनी होगी. शहबाज शरीफ का नाम मुनीर के बाद आना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी उन्हें महज एक ‘प्रशासनिक मुखौटा’ मानती है. हकीकत यह है कि मौजूदा पाकिस्तानी सरकार पूरी तरह से सेना की ‘पिछलग्गू’ बनकर रह गई है. 

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