तेल-गैस ही नहीं, ‘खजूर’ का भी ‘बादशाह’ है ईरान, रमजान के बीच जानिए 70 देशों में फैले 1700 करोड़ के मीठे साम्राज्‍य की कहानी

Latest and Breaking News on NDTV तेल-गैस ही नहीं, 'खजूर' का भी 'बादशाह' है ईरान, रमजान के बीच जानिए 70 देशों में फैले 1700 करोड़ के मीठे साम्राज्‍य की कहानी


Iran Dates Story: कोई जब ईरान का नाम लेती है, तो सबसे पहले तेल और गैस की तस्‍वीर सामने आती है. दुनियाभर के देशों में ईरान के तेल-गैस का बड़ा इस्‍तेमाल होता रहा है. लेकिन तेल-गैस के अलावा ईरान और भी कई मोर्चे पर ‘बादशाहत’ रखता है. डेयरी सेक्‍टर में भी ईरान की धाक कम नहीं, स्किम्‍ड मिल्‍क पाउडर का वो 5वां सबसे बड़ा निर्यातक है. ये हमने आपको मीठे साम्राज्‍य की ऐसी ही एक और अहम कहानी है- खजूर (Dates) की. जी हां, खजूर, जिसके बिना भारत समेत दुनियाभर के देशों में रमजान अधूरा है. 

खजूर एक ऐसा कृषि उत्पाद, जिसका ईरान की इकोनॉमी में बड़ा योगदान है. आंकड़े बताते हैं कि ईरान हर साल करीब 1,700 करोड़ रुपये (200 मिलियन डॉलर से ज्यादा) का खजूर निर्यात करता है और ये उसके लिए विदेशी मुद्रा का एक अहम स्रोत बन चुका है. तेल-गैस के साये से इतर निकलकर, ईरान का ये ‘मीठा कारोबार’ आज दुनिया के किचन से लेकर कूटनीति तक असर डाल रहा है.

खजूर के लिए मुफीद है ‘मिट्टी’, दूसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक  

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, ईरान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खजूर उत्पादक देश है. यहां हर साल 10 लाख टन (1 मिलियन टन) से ज्यादा खजूर पैदा होता है. 

ईरान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से खासकर केरमान, सिस्तान-बालूचिस्तान और खुजेस्तान खजूर की खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं. यही वजह है कि यहां की प्रीमियम किस्में दुनियाभर में मशहूर हैं, जिनकी मांग यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों तक फैली हुई है.

  • मजाफाती (Mazafati) – नरम, रसीला और गहरे रंग का
  • पियारम (Piarom) – हाई-एंड, एक्सपोर्ट क्वालिटी, कम शुगर और लंबी शेल्फ लाइफ

ईरान के खजूर का बड़ा ग्राहक है भारत 

ईरान के खजूर की कहानी भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत ईरानी खजूर का सबसे बड़ा आयातक है. भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के आंकड़ों के अनुसार, भारत हर साल बड़ी मात्रा में खजूर आयात करता है, जिसमें ईरान की हिस्सेदारी काफी बड़ी है.

रमजान के दौरान रोजा खोलने का अहम हिस्‍सा 

रमजान के दौरान खजूर की मांग दुनियाभर में तेजी से बढ़ जाती है. इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा खोलने के लिए खजूर का सेवन किया जाता है. भारत में भी खजूर सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि इससे कहीं ज्‍यादा है. ये रोजा खोलने का अहम हिस्सा है. इसके अलावा त्योहारों और शादियों में ईरान के खजूर का खूब इस्‍तेमाल होता है. हेल्दी र्डाईफ्रूट्स के रूप में इसकी खूब मांग है.  

आशंका जताई जा रही थी कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर भारत में खजूर की कीमतों और सप्लाई पर सीधा असर दिखेगा. हालांकि फिलहाल इसके भाव में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि रमजान से पहले ही बड़ी मात्रा में खजूर का निर्यात हो चुका होता है.

Latest and Breaking News on NDTV

जियोपॉलिटिक्स में ‘खजूर डिप्लोमेसी’

मौजूदा समय में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ी चिंता है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)-दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान गुजरता है. अगर यहां किसी तरह का अवरोध पैदा होता है, तो असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा. ऐसी स्थिति में शिपिंग लागत बढ़ सकती है और खजूर जैसे कृषि उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं. 

जानकार बताते हैं कि ईरान से सप्लाई प्रभावित होने पर विकल्प के तौर पर सऊदी अरब, यूएई या ट्यूनीशिया से आयात बढ़ सकता है. हालांकि ईरानी खजूर की गुणवत्ता और कीमत का संतुलन इसे वैश्विक बाजार में खास बनाता है. ये दिखाता है कि एक छोटा सा ड्राईफ्रूट भी कैसे वैश्विक राजनीति और व्यापार का हिस्सा बना हुआ है.

ये भी पढ़ें: महंगाई से पाकिस्तान में त्राहिमाम! अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध का अंजाम




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *