नेपाल में तेल का बिगाड़ा खेल, 15 दिनों में 5 अरब का घाटा, हवाई ईंधन की कीमतों में 98% का ऐतिहासिक इजाफा

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की आग अब नेपाल के खजाने को झुलसा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद, नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतें तो स्थिर रखी हैं, लेकिन इसके बदले निगम को महज 15 दिनों में 5 अरब नेपाली रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. इस बीच नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने घरेलू हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों को रातों-रात 127 रुपये से बढ़ाकर 251 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यानी इसमें 98% का इजाफा किया है.

15 दिनों में 5 अरब की ‘चोट’

नेपाल ऑयल लिमिटेड ने ATF के नए रेट जारी किए हैं. उनका कहना है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से नए रेट लिस्ट मिली है. इसमें प्राइस लगातार बढ़ रहा हूं. जनहित में कीमतों को स्थिर रखने के कारण निगम को पिछले 15 दिनों में लगभग 5 अरब रुपये का घाटा उठाना पड़ा है. अनुमान है कि अगर यही स्थिति रही, तो अगले 15 दिनों में कुल घाटा 13 अरब 21 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

हवाई ईंधन में भारी इजाफा

इस संकट का सबसे बड़ा प्रहार हवाई क्षेत्र पर हुआ है. निगम ने 31 मार्च की मध्यरात्रि से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन की कीमतों में भारी बदलाव किए हैं. घरेलू हवाई ईंधन की कीमत 127 रुपये प्रति लीटर से सीधे बढ़ाकर 251 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. यह लगभग 98% की वृद्धि है. वहीं अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन की कीमत भी बढ़ाई गई है.  काठमांडू के लिए इसकी कीमत 966 डॉलर से बढ़ाकर 1,785 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दी गई है. वहीं, पोखरा और भैरहवा के लिए इसे ब्रेक-ईवन पॉइंट पर स्थिर रखा गया है.

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आम जनता को फिलहाल राहत

नेपाल में आम लोगों को राहत दी गई है. कच्चे तेल में इजाफा और अरबों के नुकसान के बाद भी नेपाल में पेट्रोल, डीजल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस की पुरानी खुदरा कीमतों को नहीं बढ़ाया गया है.  इस घाटे की भरपाई के लिए निगम अपने फंड का इस्तेमाल कर रहा है. लगातार बढ़ते घाटे के कारण निगम ने संकेत दिया है कि भविष्य में पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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