बंगाल चुनाव के बीच ममता बनर्जी ने अपनी ‘जान को खतरा’ बताया, विपक्ष ने की जांच की मांग

बंगाल चुनाव के बीच ममता बनर्जी ने अपनी 'जान को खतरा' बताया, विपक्ष ने की जांच की मांग बंगाल चुनाव के बीच ममता बनर्जी ने अपनी 'जान को खतरा' बताया, विपक्ष ने की जांच की मांग

कलकत्ता:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सोमवार को उस समय राजनीतिक विवाद तेज हो गया, जब ममता बनर्जी ने अपनी हत्या की साजिश का दावा किया. इस बयान पर विभिन्न दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मनबाजार में एक सभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि उनकी जान को खतरा है. इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं में चिंता बढ़ गई, वहीं भाजपा ने इस पर पलटवार किया.

कांग्रेस प्रवक्ता बोलीं- इसे गंभीरता से लेकर जांच होनी चाहिए

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कोई मौजूदा मुख्यमंत्री अपनी जान को खतरा बता रहा है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे शीर्ष स्तर पर ध्यान दिया जाना जरूरी है.

श्रीनेत ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीति में बढ़ती नफरत और बयानबाजी, खासकर भाजपा की ओर से विपक्ष के खिलाफ, ऐसा माहौल बना रही है जहां नेताओं की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने राहुल गांधी को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि वह अपने नेता की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

तेजस्वी बोले- ममता की बात को गंभीरता से लेने की जरूरत

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी ममता बनर्जी के बयान को गंभीरता से लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी ऐसा कह रही हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में फिर से चुनाव जीतेंगी.

भाजपा ने ममता के आरोपों को सिरे से किया खारिज

दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था और शासन पर सवाल उठाए. भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि ममता बनर्जी को खुद खतरा नहीं है, बल्कि उनके शासन में राज्य की जनता परेशान है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नीतियों के कारण गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं बढ़ी हैं और जनता का भरोसा अब भाजपा की ओर बढ़ रहा है.

भाजपा लगातार टीएमसी सरकार पर प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने के आरोप लगाती रही है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र और भाजपा नेताओं पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई और दबाव बनाने का आरोप लगाती रही है.

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