बंगाल में आज रात प्रकाशित हो अंतिम सप्लीमेंट्री मतदाता सूची, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अहम आदेश

बंगाल में आज रात प्रकाशित हो अंतिम सप्लीमेंट्री मतदाता सूची, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अहम आदेश बंगाल में आज रात प्रकाशित हो अंतिम सप्लीमेंट्री मतदाता सूची, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अहम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामले में चुनाव आयोग को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि आज रात ही अंतिम सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाए. कोर्ट ने साफ किया कि आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया आज पूरी होने की संभावना है, इसलिए डिजिटल हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी न होने के बावजूद सूची जारी की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग आज रात सप्लीमेंट्री सूची प्रकाशित करे, भले ही सभी मामलों में डिजिटल हस्ताक्षर पूरे न हुए हों.

एक तरह से चमत्कार किया

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित अधिकारियों को दोबारा लॉगिन एक्सेस दिया जाएगा और इसके लिए पोर्टल 7 अप्रैल 2026 को भी खुला रहेगा. इसका साफ मतलब यह है कि इसके बाद मतदाता सूची फ्रीज मानी जाएगी. पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के SIR पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों ने 60 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निपटारा कर एक तरह का “चमत्कार” किया है. कोर्ट ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर काम पूरा किया गया.

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अपील के बावजूद नहीं जुड़ेंगे नाम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) समर्थकों की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील मंजूर हो जाती है तो नामों को अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जाए. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि करीब 60 लाख नामों में से लगभग 55 प्रतिशत दावों को न्यायिक अधिकारियों ने स्वीकार किया, जबकि 45 प्रतिशत दावों को खारिज किया गया.

उन्होंने यह भी बताया कि करीब 7 लाख अपीलें दाखिल की जा चुकी हैं और 15 अप्रैल तक इनके निपटारे के बाद सफल आवेदकों के नाम जोड़ने की अनुमति दी जाए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को ठुकरा दिया. कोर्ट ने कहा कि उसने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए न्यायिक अधिकारियों को यह काम सौंपा था, क्योंकि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी थी.

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

पीठ ने स्पष्ट किया कि-

  • न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच के बाद जिन नामों को मंजूरी दी गई, उन्हें पहले ही सप्लीमेंट्री सूचियों के जरिए जोड़ा जा चुका है.
  • न्यायिक अधिकारियों ने मतदाता पंजीकरण अधिकारियों के रूप में दावों की जांच की है.
  • जिन नामों को न्यायिक अधिकारियों ने मंजूरी दी, उन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बाद सप्लीमेंट्री सूचियों के माध्यम से शामिल किया गया.
  • यह प्रक्रिया अपीलीय ट्रिब्यूनलों में खारिज किए गए दावों पर दायर अपीलों के नतीजों तक नहीं बढ़ाई जा सकती.
  • यदि अपीलीय ट्रिब्यूनलों से कहा जाए कि वे लाखों अपीलों का 15 अप्रैल तक निपटारा करें, तो इससे ट्रिब्यूनलों पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा और अराजक स्थिति पैदा हो सकती है.

 अंतरिम राहत की मांग भी नामंजूर

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुझाव दिया कि अपीलीय ट्रिब्यूनल पहली नजर में संतुष्टि के आधार पर अंतरिम आदेश जारी कर पहले से वोट कर चुके लोगों के नाम जोड़ सकें. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव को भी स्वीकार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि अपीलीय ट्रिब्यूनल अनुभवी पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों की अध्यक्षता में हैं, इसलिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित समिति 7 अप्रैल तक इन ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली तय करेगी.

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चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्री नायडू ने कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनलों के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं और वे पूरी तरह काम शुरू करने के लिए तैयार हैं. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने यह भी बताया कि संविधान की मूल प्रति के चित्र बनाने वाले प्रसिद्ध कलाकार नंदलाल बोस के 88 वर्षीय पोते का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है.

19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित, अपील का पूरा अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामलों में अपील के लिए Election Commission of India ने 20 मार्च 2026 को कुल 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए हैं. इन ट्रिब्यूनलों की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ जज कर रहे हैं.  कोर्ट ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं या जिन लोगों को किसी नाम के शामिल किए जाने पर आपत्ति है, वे इन ट्रिब्यूनलों के सामने अपील कर सकते हैं. ट्रिब्यूनलों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे रिकॉर्ड की दोबारा जांच करें और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दें.

एकरूप प्रक्रिया के लिए तीन जजों की समिति बनेगी

सुनवाई में प्रक्रिया को एकरूप बनाए रखने पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों/जजों की एक समिति गठित की जाए, जो सभी 19 ट्रिब्यूनलों के लिए सुनवाई की कार्यप्रणाली तय करेगी. कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया 7 अप्रैल 2026 तक निर्धारित कर दी जानी चाहिए, ताकि ट्रिब्यूनलों के कामकाज में किसी तरह की असमानता न रहे. चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सभी अपीलीय ट्रिब्यूनल काम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध करा दिया गया है.

ऑनलाइन‑ऑफलाइन अपील, 7 और 13 अप्रैल की अहम समयसीमा

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI को निर्देश दिया कि वह 7 अप्रैल तक ट्रिब्यूनलों के सदस्यों (पूर्व जजों) के मानदेय और अन्य खर्चों को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी करे. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अपील ऑनलाइन (ECI NET प्लेटफॉर्म) और ऑफलाइन (DM/SDM/SDO कार्यालय) दोनों माध्यमों से दाखिल की जा सकती है. ऑफलाइन अपील की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा रसीद या स्वीकृति देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में अपीलीय ट्रिब्यूनल को 13 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही, इस पूरे मामले की अगली सुनवाई भी 13 अप्रैल को दोपहर 3 बजे तय की गई है.
 




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