बिना सजा के नहीं छोड़ना, आम आदमी की सोच है कि रिश्वत से कुछ भी करा लेगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खींची लंबी लकीर

बिना सजा के नहीं छोड़ना, आम आदमी की सोच है कि रिश्वत से कुछ भी करा लेगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खींची लंबी लकीर बिना सजा के नहीं छोड़ना, आम आदमी की सोच है कि रिश्वत से कुछ भी करा लेगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खींची लंबी लकीर

इलाहाबाद:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर में फर्जी पीएचडी डिग्री और यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर हुई लाखों की ठगी के मामले में महिला की याचिका खारिज कर दी है.एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दायर क्रिमिनल रिट याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है कि समाज में एक बहुत ही डरावना चलन देखा जा रहा है. आम आदमी में यह सोच बन गई है कि रिश्वत देकर कुछ भी किया जा सकता है.कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध समाज में कमजोर नैतिकता की निशानी है. समाज में कुछ नैतिकता वापस लाने के लिए ऐसे अपराधों को बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए. यह टिप्पणी जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने याचिकाकर्ता प्रियंका सेंगर को राहत देने से इनकार करते हुए की. 

कानपुर में दर्ज हुई थी एफआईआर

याचिकाकर्ता प्रियंका सेंगर के खिलाफ 14 सितंबर 2024 को कानपुर के स्वरूप नगर थाने में  आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 506 में एफआईआर दर्ज हुई थी. याची महिला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से FIR को रद्द करने की मांग करते हुए क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी. ये एफआईआर शिकायतकर्ता तान्या दीक्षित नाम की महिला ने कराई थी. एफआईआर में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वो विक्रम सिंह सेंगर से मिलीं, जो अक्सर उसके घर आने-जाने लगे थे. कभी-कभी विक्रम अपनी मां तृप्ति सिंह सेंगर और अपनी दोस्त प्रियंका सिंह सेंगर, जो इस मामले में याचिकाकर्ता हैं, उसके साथ आते थे.

कानपुर यूनिवर्सिटी का मामला

ये सभी सरकार, प्रशासन और कानपुर यूनिवर्सिटी में अपने संबंध होने के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते थे और यह भी दावा करते थे कि उन्होंने दूसरों के लिए कई जरूरी काम करवाए है, जिनमें नौकरी दिलवाना भी शामिल है. शिकायतकर्ता ने कहा कि अगर उनके पास PhD की डिग्री या NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) की योग्यता होती तो वो भी किसी यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए आवेदन करने के बारे में सोच सकती थी. इसके बाद सभी ने तान्या दीक्षित से कहा कि उन्हें PhD की डिग्री हासिल करने की चिंता नहीं करनी चाहिए. उन्होंने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वे पीएचडी कोर्स में उनका दाखिला करवा देंगे और उनके लिए नौकरी भी दिलवा देंगे. शिकायतकर्ता पीएचडी प्रोग्राम के साथ-साथ नौकरी भी कर सकती हैं.

इस काम के लिए याची प्रियंका सेंगर समेत सभी ने शिकायतकर्ता से 22 लाख रुपये का इंतजाम करने को कहा था और उनसे नौकरी का झांसा देते हुए कहा कि उनके यूनिवर्सिटी में बड़े लोगों से अच्छे संबंध है और वो शिकायतकर्ता के लिए कहीं न कहीं नौकरी का इंतजाम करवा देंगे. इसके बाद शिकायतकर्ता ने इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए आरोपी के बैंक खातों में कुल 22 लाख 18 हजार की रकम ट्रांसफर कर दी.

फर्जी डिग्री से सरकारी नौकरी की कोशिश

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके साथ ठगी करते हुए सभी ने उसको PHD के फर्जी दस्तावेज दिए और साथ ही इसमें कानपुर स्थित यूनिवर्सिटी से नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें उसे ज्वॉइन करने के लिए कहा गया था. लेकिन जब शिकायतकर्ता अपना ज्वॉइनिंग लेटर लेकर यूनिवर्सिटी गई तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने उसे बताया कि सभी दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी हैं. इसके बाद जब शिकायतकर्ता ने आरोपी को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी तो उन्होंने जान से मारने की धमकी दी. साथ ही गंभीर अपराधों में झूठा फंसाने की भी धमकी दी. सुनवाई के दौरान आरोपी याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि इस मामले में दो अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत दी जा चुकी है और इस आधार पर याची प्रियंका सेंगर की एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की गई. 

कोर्ट ने FIR को देखने के बाद कहा कि आरोप बहुत गंभीर हैं और समाज में एक बहुत ही डरावना चलन दिखाता है, जहां आम आदमी में यह सोच बन गई है कि रिश्वत देकर कुछ भी किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता जो खुद एक पढ़ी-लिखी महिला थी वो धोखाधड़ी के झांसे में आ गई. कथित तौर पर याचिकाकर्ता ने उससे 22 लाख रुपये और उससे ज्यादा की बड़ी रकम ऐंठ ली. PhDकोर्स में एडमिशन या यूनिवर्सिटी में अपॉइंटमेंट इन यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत तय प्रोसेस के अलावा नहीं हो सकता.

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यूनिवर्सिटी में टीचिंग पोस्ट

कोर्ट ने याचिकाकर्ता आरोपी महिला की एफआईआर रद करने वाली मांग में दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा कि PhD यूनिवर्सिटी से पीएचडी प्रोग्राम को फॉलो करने और उसे सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद मिलती है, जबकि यूनिवर्सिटी में टीचिंग पोस्ट पर अपॉइंटमेंट रिक्रूटमेंट प्रोसेस से गुजरने के बाद मिलती है. इसमें पोस्ट का विज्ञापन और उसके लिए आवेदन करना शामिल है. फिर भी आम आदमी का भ्रष्ट तरीकों के असर पर भरोसा होने की वजह से शिकायतकर्ता याचिकाकर्ता के झांसे में आ गया. कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा अपराध समाज में नैतिकता की बहुत कमजोरी दिखाता है और इस तरह के अपराधियों को बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए.

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ईमानदारी से जांच करने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि वो ये नहीं कहती कि FIR में लगाए गए आरोप सही हैं, क्योंकि शायद इस कार्रवाई में ऐसा नहीं कह सकते. साथ ही आरोपों की प्रकृति को देखते हुए कोर्ट ने माना कि पुलिस को इनकी पूरी और ईमानदारी से जांच करनी चाहिए और यह मामला संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दखल देने का सही मामला नहीं लगता. कोर्ट ने इस आदेश को ऑर्डर रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) द्वारा चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कानपुर शहर के माध्यम से पुलिस कमिश्नर, कानपुर नगर और स्टेशन हाउस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन स्वरूप नगर, डिस्ट्रिक्ट कानपुर नगर को भेजने का आदेश दिया.
 





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