राघव चड्ढा पर AAP की पहली प्रतिक्रिया, ‘आप केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे’

राघव चड्ढा पर AAP की पहली प्रतिक्रिया, 'आप केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे' राघव चड्ढा पर AAP की पहली प्रतिक्रिया, 'आप केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे'

नई दिल्ली:

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयान और वीडियो को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है. पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब अरविंद केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे हैं और सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से घबराने लगे हैं.

अनुराग ढांडा ने कहा, ‘हम केजरीवाल के सिपाही हैं. निडरता हमारी पहली पहचान है. जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?’

‘संसद में सीमित मिलता है, ऐसे मुद्दों पर बर्बाद न करें’

उन्होंने संसद में राघव चड्ढा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को संसद में बोलने का सीमित समय मिलता है, लेकिन उस समय का इस्तेमाल ‘देश बचाने के संघर्ष’ के बजाय ‘एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने’ जैसे मुद्दों पर किया गया.

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कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और चुप्पी का आरोप

अनुराग ढांडा ने दावा किया कि गुजरात में AAP के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को बीजेपी की सरकार और पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन इस मुद्दे पर राघव चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मताधिकार छीने जाने के मुद्दे पर जब CEC के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, तो राघव चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.

‘वॉकआउट के दौरान भी बैठे रहे’

उन्होंने कहा कि जब AAP ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी राघव चड्ढा मौजूदगी दर्ज कराने के लिए सदन में बैठे रहे. अनुराग ढांडा ने तीखे शब्दों में कहा, ‘पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो, राघव. देश के असली मुद्दों पर बोलने से डरते हो.’

सौरभ भारद्वाज ने भी राघव को घेरा

इसके अलावा AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वे संसद में सॉफ्ट PR कर रहे थे. जबकि पार्टी को संसद में बोलने का सीमित समय मिलता है. सौरभ भारद्वाज ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या उन्होंने गुजरात में गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में संसद में आवाज उठाई? उन्होंने यह भी सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर कथित हमलों के मुद्दे पर चड्ढा ने कोई ठोस पहल क्यों नहीं की. सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि संसद में सीमित समय का उपयोग गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए, लेकिन राघव चड्ढा उस भूमिका में सक्रिय नहीं दिख रहे. यह भी आरोप लगाया गया कि जब पार्टी सांसद वॉकआउट करते हैं, तब भी चड्ढा सदन में मौजूद रहते हैं. 






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