नोएडा:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. शनिवार को पहले फेज का उद्घाटन होगा, जिसकी लागत 11,282 करोड़ रुपये है. वहीं, पूरे एयरपोर्ट की लागत 29,560 करोड़ रुपये है. इस एयरपोर्ट का मकसद जेवर को उत्तरी भारत के लिए बड़ा एविएशन हब बनाना है. सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन भी करेंगे.
जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल होगा. इसके साथ ही जिस कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया जाएगा, उसकी शुरुआती सालाना हैंडलिंग क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन होगी, जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है.
पीएम मोदी एक मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) फैसिलिटी का उद्घाटन भी करेंगे. 40 एकड़ में फैली MRO सुविधा से घरेलू विमानों के रखरखाव को बढ़ावा मिलने और एविएशन सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ने की उम्मीद है. इस एयरपोर्ट को देश का सबसे आधुनिक और डिजिटल-फर्स्ट एयरपोर्ट बनाने की योजना तैयार की गई है.
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10 पॉइंट्स में जानें- क्या कुछ होगा खास?
- 100% ‘डिजी यात्रा’ सुविधाः यह भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा जहां एंट्री से लेकर बोर्डिंग तक पूरी तरह से पेपरलेस एक्सपीरियंस मिलेगा. यात्रियों को अपना बोर्डिंग पास या आईडी दिखाने की जरूरत नहीं होगी. उनका चेहरा ही उनका टिकट होगा. सुरक्षा जांच और बोर्डिंग गेट्स पर ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक सिस्टम लगा होगा, जिससे लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा.
- स्मार्ट बैगेज ट्रैकिंगः यात्री अपने स्मार्टफोन ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि उनका बैग इस समय कहां है? जैसे- उनका बैगेज चेक-इन काउंटर पर है या विमान में लोड हो रहा है या बेल्ट पर आ रहा है. इससे सामान खोने या देरी होने की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी.
- इन-डोर नेविगेशन ऐपः यात्रियों की सुविधा के लिए एक खास ‘वे-फाइंडिंग’ तकनीक शुरू की गई है. एयरपोर्ट का मोबाइल ऐप आपको अपनी करंट लोकेशन से गेट नंबर, लाउंज या ड्यूटी-फ्री शॉप तक का सटीक रास्ता (गूगल मैप्स की तरह) दिखाएगा.
- कॉन्टैक्टलेस सेल्फ सर्विसः एयरपोर्ट पर ज्यादा से ज्यादा सेल्फ सर्विस पर फोकस किया गया है. यात्री खुद अपना सामान टैग करके मशीन में डाल सकेंगे, जिससे काउंटर पर खड़े होने की जरूरत नहीं होगी. एयरपोर्ट पर कई जगह ‘डिजिटल कियोस्क’ होंगे जहां AI-पावर्ड असिस्टेंट यात्रियों के सवालों के जवाब देंगे.
- स्मार्ट पार्किंग और EV चार्जिंगः यात्री घर से निकलने से पहले ही ऐप के जरिए अपना पार्किंग स्लॉट बुक कर सकेंगे. पार्किंग शुल्क का भुगतान सीधे फास्ट टैग से होगा, जिससे गेट पर रुकना नहीं पड़ेगा.
- नेट-जीरो और ग्रीन ऑपरेशंसः एयरपोर्ट का डिजिटल ट्विन सॉफ्टवेयर रियल-टाइम में बिजली और पानी की खपत की मॉनिटरिंग करेगा, जिससे ऊर्जा की बर्बादी को रोका जा सके. यहां बड़े-बड़े सोलर पैनल लगाए गए हैं. यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जो अपनी जरूरत की पूरी बिजली खुद पैदा करेगा.
- सबसे कम टर्निंग टाइमः नोएडा एयरपोर्ट का रनवे और टैक्सी-वे इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि विमान लैंडिंग के बाद बहुत कम समय में दोबारा उड़ान के लिए तैयार हो सकेंगे. इससे एयरलाइंस का ईंधन और यात्रियों का समय बचेगा.
- इन-डोर ग्रीन फॉरेस्टः टर्मिनल के अंदर एक बड़ा आर्टिफिशियल फॉरेस्ट और वॉटरफॉल बनाया गया है. यह सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट की तरह ही बनाया गया है.
- ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटरः टर्मिनल के ठीक सामने एक मल्टी-मॉडल सेंटर बनाया गया है जहां मेट्रो, हाई-स्पीड रेल (RRTS), बसें और टैक्सी एक ही जगह उपलब्ध होंगी. यात्री को लंबी दूरी पैदल नहीं चलनी पड़ेगी.
- स्विस तकनीक और भारतीय संस्कृति का संगमः इसका डिजाइन स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट तकनीक पर आधारित है, लेकिन इसकी वास्तुकला में वाराणसी के घाटों और भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है.
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