Oracle Layoffs: दिग्गज मल्टीनेशनल आईटी कंपनी ओरेकल (Oracle) में पिछले दिनों बड़े पैमाने पर हुई छंटनी का मामला अब कॉरपोरेट और सियासी गलियारों से होता हुआ केंद्र सरकार के दरवाजे तक पहुंच गया है. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की गई है. पत्र में चिंता जताई गई है कि 12,000 कर्मचारियों के परिवारों की जिम्मेदारी भला कौन लेगा. अचानक नौकरी जाने के बाद उन हजारों परिवारों की आजीविका का क्या होगा जो पीछे छूट गए हैं? पत्र के माध्यम से केंद्र का ध्यान इस ओर भी खींचा गया है कि विदेशी कंपनियों को भारी टैक्स रियायतें, पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, उनके अनुकूल नीतियां तैयार की जाती हैं. बदले में उन कंपनियों की जिम्मेदारी रोजगार पैदा करने की होती है. इस तरह बड़े पैमाने पर छंटनी करना सामाजिक अनुबंध (Social Contract) का भी उल्लंघन है.
सांसद ने श्रम मंत्री को लिखा पत्र, जताई चिंता
सीपीआई (ML) लिबरेशन के सांसद राजाराम सिंह ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखा है और सवाल उठाया है कि बिना किसी पूर्व सूचना के हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद उनके परिवारों की पालन-पोषण की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? सांसद राजाराम सिंह ने अपने पत्र में ओरेकल द्वारा भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों को निकालने की खबरों पर ‘गहरी चिंता और आक्रोश’ व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर जगत की इस दिग्गज कंपनी का यह कदम न केवल कॉर्पोरेट जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा में सरकार की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा करता है.
‘टैक्स छूट और सुविधाएं लेकर जिम्मेदारी से भाग रही कंपनियां’
लेफ्ट नेता ने सरकार को ध्यान दिलाया कि भारत में काम करने वाली विदेशी कंपनियों को भारी टैक्स रियायतें, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और अनुकूल नीतियां दी जाती हैं. उन्होंने पत्र में लिखा, ‘इन सुविधाओं के बदले कंपनियों की जिम्मेदारी रोजगार पैदा करने की होती है. बिना किसी नोटिस के बड़े पैमाने पर छंटनी करना उस सामाजिक अनुबंध (Social Contract) का उल्लंघन है, जिस पर सम्मानजनक रोजगार की नींव टिकी है.’
सांसद के सवाल और सरकार से मांग
राजाराम सिंह ने छंटनी के तरीके पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया. उन्होंने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि अचानक नौकरी जाने के बाद उन हजारों परिवारों की आजीविका का क्या होगा जो पीछे छूट गए हैं? सरकार की चुप्पी क्या बड़े कॉरपोरेट्स को यह संदेश दे रही है कि भारत में लेबर प्रोटेक्शन के नियम ‘परक्राम्य’ (Negotiable) हैं?
उन्होंने श्रम मंत्री से मांग की है कि
- ओरेकल से इस छंटनी पर तत्काल और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा जाए.
- मनमानी सामूहिक छंटनी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं.
- कर्मचारियों को अचानक और अन्यायपूर्ण तरीके से नौकरी से निकालने से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं.
केवल भारत में 12,000 कर्मी निकाले गए
अमेरिकी आईटी फर्म ओरेकल ने वैश्विक स्तर पर लगभग 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में भी करीब 12,000 स्टाफ को गुलाबी पर्ची (Pink Slip) थमा दी गई है. प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि अगले एक महीने के भीतर छंटनी का एक और दौर आने की आशंका है. भारत में ओरेकल के कुल करीब 30,000 कर्मचारी हैं, जिसका मतलब है कि कंपनी ने अपनी भारतीय वर्कफोर्स के एक बड़े हिस्से पर कैंची चलाई है.
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार की चुप्पी आईटी उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों की नौकरी की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय कर्मियों को ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ की वस्तु न समझा जाए.
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