16,000 फीट पटरी पर दौड़ी ‘मोनोरेल’, भारतीय सेना का अनोखा प्रयास बना रिकॉर्ड

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नई दिल्ली:

चीन से लगी सीमा के पास ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भारतीय सेना ने एक बड़ा अनोखा कार्य किया है.सेना ने 16,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर एक खास मोनोरेल ट्रांसपोर्ट प्रणालई तैनात किया है. इसे एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दी हैं. यह मोनो रेल उन जगहों पर काम कर रहा है, जहां सामान्य गाड़ियां पहुंच ही नहीं पाती थी. यहां की बेहद कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम कर रहा है. पिछले चार महीनों से यह बिना किसी भी बाधा के चल रही है. किसी भी परिस्थिति में चाहे दिन हो या रात, तेज बर्फबारी हो या शून्य से नीचे तापमान, यह हर हाल में यह सक्रिय रहता है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.वास्तव में स्थिति यह है कि ऊंचाई वाले इलाकों में ज़्यादातर मौके पर मौसम अचानक खराब हो जाता है.

कई बार सड़कें बंद हो जाती हैं और हेलीकॉप्टर भी उड़ नहीं पाते. ऐसे में सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इस मुश्किल हालात में मोनो रेल सिस्टम ने इस समस्या को काफी हद तक कम कर दिया है. अब इस सिस्टम के जरिए अग्रिम चौकियों तक लगातार सामानों जैसे राशन, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी सामान आसानी से भेजी जा रही है. पहले जहां सैनिकों को भारी सामान खुद उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता था या जानवरों का सहारा लेना पड़ता था, अब यह काम मशीन के जरिए सरलता से हो रहा है.

इससे सैनिकों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने ऑपरेशन पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं.इसके अलावा यह मोनोरेल सिस्टम सिर्फ सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं है. जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक लाने के लिए भी किया जा सकता है. ऐसे इलाकों में जहां हेलीकॉप्टर उतरना मुश्किल होता है, वहां यह सिस्टम बेहद कारगर साबित हो रहा है.

इस खास उपलब्धि के लिए भारतीय सेना के इस अनोखे प्रयास को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है. इतनी ऊंचाई पर इस तरह का सिस्टम बनाना और उसे लगातार चलाना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इस सिस्टम को तैयार करना आसान नहीं था. इसे सेना की इंजीनियर टीम ने बेहद कठिन परिस्थितियों में बनाया. कम ऑक्सीजन, कड़ाके की ठंड और खराब मौसम के बीच काम करना एक बड़ी चुनौती थी. इसके बावजूद टीम ने कम समय में इसे तैयार कर दिया. पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह सिस्टम आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण है. यह दिखाता है कि भारतीय सेना अब आधुनिक तकनीक के जरिए हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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