मिडिल ईस्ट में 40 दिनों से जारी भीषण जंग के बाद जब अमेरिका और ईरान की ओर से सीजफायर का ऐलान हुआ, तो शांति की उम्मीद दिखी. लेकिन महज 24 घंटे बाद ही कहानी पूरी तरह पलटती दिख रही है. यह सीजफायर अब धागे की तरह टूटता नजर आ रहा है. इस संघर्ष के तीन धुव्र ईरान, इजरायल और अमेरिका के बयान ही आपस में अलग-थलग नजर आ रहे हैं. कूटनीतिक बयानों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि यह सीजफायर अब किसी भी वक्त इतिहास बन सकता है. आइए समझते हैं आखिर यह पूरा मामला क्या है?
अमेरिका का कड़ा रुख, ईरान का प्रस्ताव ‘कूड़े में फेंका’
कूटनीतिक मंच पर सबसे बड़ी हलचल अमेरिका के उस बयान से हुई है जिसमें उसने ईरान द्वारा पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. अमेरिकी प्रशासन ने बेहद तल्ख लहजे में कहा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को ‘कूड़े के डिब्बे में डाल दिया है.’ इस बयान से साफ है कि अमेरिका ईरान की किसी भी शर्त को मानने के मूड में नहीं है और वह मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगियों खासकर इजरायल के रुख का पूरी तरह समर्थन कर रहा है.
अमेरिका ने इजरायल द्वारा लेबनान पर किए जा रहे हमलों का भी समर्थन किया है. अमेरिका ने साफ कहा है कि सीजफायर की शर्त में लेबनान पर हमले रोकना शामिल नहीं है. यह बिल्कुल अलग विवाद है.
इजरायल ने और तेज कर दिए लेबनान पर हमले
सीजफायर समझौते की स्याही सूखने से पहले ही इजरायल ने इसमें एक बड़ी तकनीकी खामी का हवाला दे दिया है. इजरायल का कहना है कि मौजूदा सीजफायर डील में लेबनान को लेकर कोई जिक्र नहीं है. इसी को आधार बनाते हुए इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अपने सैन्य हमले और ऑपरेशन्स जारी रखेगा. इजरायल ने आज लेबनान पर पहले से कहीं ज्यादा तेज हमले किए. इन हमलों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है. वहीं खबर यह भी है कि इजरायल सीजफायर के फैसले से भी खुश नहीं है.
ईरान की पलटवार- ‘गेंद अब आपके पाले में’
इजरायल के लेबनान पर हमले जारी रखने के ऐलान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर एक भी हमला होता है, तो यह पूरा सीजफायर टूट जाएगा. ईरान ने अमेरिका और इजरायल दोनों को चेतावनी देते हुए कहा है, ‘गेंद अब आपके पाले में है.’ इसका सीधा मतलब है कि अगर हमले नहीं रुके, तो ईरान और उसके समर्थित गुटों की ओर से बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई हो सकती है.
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क्या पड़ेगा इसका असर?
अगर ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर टूटता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर होगा. लेबनान पर इजरायली हमले जारी रहने से हिजबुल्लाह पूरी ताकत से युद्ध में कूद सकता है. इससे यह संघर्ष एक या दो मोर्चों से बढ़कर पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा, जिसमें ईरान की सीधी एंट्री का खतरा सबसे ज्यादा है. इसके अलावा होर्मुज से होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है. इससे रातों-रात पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आएगा. सीजफायर टूटना मध्यस्थता करने वाले देशों के लिए भी बड़ा झटका है. 24 घंटे के भीतर समझौते का विफल होना यह दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है.
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