बिहार के नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा स्थित प्रसिद्ध शीतला देवी मंदिर में भगदड़ मचने से 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जहां लोग अपने परिजनों को संभालने और मदद पहुंचाने में जुटे नजर आए. हादसे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों का 6-6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है. इनमें मृतक आश्रितों को आपदा प्रबंधन विभाग से 4 -4 लाख रुपये जबकि मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया जाएगा.
मंदिर के आसपास रही व्यवस्था की कमी
पुलिस भी इस भगदड़ की घटना की जांच के दौरान मानती है कि मंदिर और मंदिर के आसपास व्यवस्था की कमी रही है. हालांकि, भगदड़ की घटना के पीछे मुख्य कारणों का पता जांच के बाद ही चलेगा. यह मंदिर स्थानीय तौर पर ही नहीं, क्षेत्रीय तौर पर लोगों की आस्था का केंद्र रहा है. यहां प्रत्येक मंगलवार को लोगों की भारी भीड़ लगती है. यहां पटना और आसपास के जिले के लोग भी मंगलवार को पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, काफी प्राचीन समय से यह आस्था का केंद्र रहा है.
सिद्धपीठ शीतला मंदिर प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है और मेला जैसा नजारा रहता है. मां के प्रांगण में रामनवमी के अवसर पर ध्वजा स्थापित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. मान्यता यह भी है कि इनके दरबार में आने वाले हर कोई दुखियारे की मन्यता पूरी होती है. इधर, भले ही इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन व्यवस्था की कमी बताई जाती है. बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार भी भगदड़ की घटना के बाद इसे स्वीकार किया है.
#WATCH | Nalanda, Bihar: A devotee breaks down as she recounts the stampede at Maa Sheetla Mandir.
“There was a massive crowd. Four of us had come from Patna. We got separated from each other. People were trampled on…” pic.twitter.com/F1WlgcOEW2
— ANI (@ANI) March 31, 2026
मंदिर में भगदड़ पर थानाध्यक्ष निलंबित
उन्होंने कहा कि मंदिर में जो व्यवस्था है, उसमें काफी कमियां हैं. मंदिर से निकलने और प्रवेश के लिए भी काफी कुछ करने की जरूरत है. डीजीपी ने माना कि जिस तरह से भीड़ होती है उसके नियमन के लिए निश्चित रूप से आज व्यवस्था रहनी चाहिए थी, लेकिन वह नहीं थी. इसके लिए थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह कोई स्थानीय तौर पर नहीं, क्षेत्रीय स्तर पर इस मंदिर की मान्यता है और लोगों की आस्था है. ऐसी स्थिति में उस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए. प्रबंधन में भी सुधार की जरूरत है. भीड़ अगर जुटी थी तो कई और व्यवस्थाएं होनी चाहिए थीं.
उन्होंने कहा कि न्यास परिषद के अध्यक्ष रणबीर नंदन से चर्चा की बात बताते हुए कहा कि जहां हजारों की भीड़ जुटती है, वहां प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. स्थानीय लोगों द्वारा पुजारियों पर दक्षिणा के लालच में श्रद्धालुओं को अनावश्यक रूप से रोकने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी.
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