नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 30 जून तक प्रमुख पेट्रोकेमिकल्स पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट दी है.पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और आपूर्ति में व्यवधान के बीच यह कदम उठाया गया है.प्लास्टिक, कपड़ा, फार्मा और ऑटो सेक्टर को इससे लाभ मिलेगा. मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन में राहत मिलने की उम्मीद है.उपभोक्ताओं को अंतिम उत्पाद की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है.छूट का उद्देश्य आपूर्ति सुनिश्चित करना और इनपुट लागत को कम करना है.
सरकार ने इससे पहले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की छूट दी थी, ताकि तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का दबाव न रहे. हालांकि एलपीजी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़े हैं और कमर्शियल सिलेंडरों के दामों में तीन बार से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के मद्देनजर महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट (customs duty exemption) देने का ऐलान किया है. इस बड़ी छूट से प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर समेत कई मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट को राहत मिलेगी, जो पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर निर्भर करते हैं.
वित्त मंत्रालय ने कहा, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और इसके नतीजे में ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट के मद्देनजर भारत सरकार ने 30 जून, 2026 तक महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का फैसला लिया है. इस छूट से प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, ऑटोमोटिव और अन्य मैन्युफैक्चरिंग पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक से जुड़े क्षेत्रों को इससे लाभ होने की उम्मीद है. इससे ग्राहकों को भी राहत मिलेगी.
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इसमें अमोनियम नाइट्रेट, पॉलिएस्टर रेजिन, फॉर्मेल्डिहाइड, यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड, मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड, फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड, निर्जल अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, मेथनॉल और एसिटिक एसिड को भी छूट दी गई है. घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने, डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर लागत दबाव को कम करने और देश में आपूर्ति स्थिरता को बहाल रखने के यह पहल एक अस्थायी रूप में लिया गया है.


