हजारों मिसाइलें अब भी बची हैं? जंग के बाद भी ईरान की ‘अंडरग्राउंड ताकत’ से क्यों डर रहा अमेरिका

हजारों मिसाइलें अब भी बची हैं? जंग के बाद भी ईरान की ‘अंडरग्राउंड ताकत’ से क्यों डर रहा अमेरिका हजारों मिसाइलें अब भी बची हैं? जंग के बाद भी ईरान की ‘अंडरग्राउंड ताकत’ से क्यों डर रहा अमेरिका

नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में युद्धविराम की कोशिशें तेज हैं. होर्मुज को फिर से खोलने की तैयारी चल रही है. लेकिन जंग की आग पूरी तरह बुझी नहीं है. वजह है ईरान का वह मिसाइल जखीरा, जो भारी हमलों के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, हफ्तों तक चले हमलों में ईरान को बड़ा नुकसान जरूर हुआ, लेकिन उसके पास अब भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें बची हैं. इनमें कई मिसाइलें भूमिगत ठिकानों में छिपी हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है.

आधी ताकत घटी, लेकिन खतरा खत्म नहीं

अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान के मिसाइल नेटवर्क को जोरदार झटका दिया. वॉल स्ट्रीट जनरल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के आधे से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर या तो तबाह हो चुके हैं, क्षतिग्रस्त हैं या फिर सुरंगों में दब गए हैं. लेकिन चिंता की बात ये है कि इनमें से कई सिस्टम बाद में निकालकर फिर से चालू किए जा सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के ‘मिसाइल प्रोग्राम लगभग खत्म’ वाले दावे के बावजूद खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं.

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भूमिगत ठिकाने बने सबसे बड़ी ढाल

ईरान की असली ताकत उसके गहरे भूमिगत मिसाइल कॉम्प्लेक्स हैं. अमेरिका और इजरायल के लिए इन्हें पूरी तरह तबाह करना आसान नहीं रहा. कई एयरस्ट्राइक में सुरंगों के मुहानों को बंद करने पर जोर दिया गया, लेकिन पूरी सुरंग प्रणाली नष्ट नहीं की जा सकी. इससे ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में मिसाइलें सुरक्षित बची हो सकती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, जंग से पहले ईरान के पास करीब 2500 मध्यम दूरी की मिसाइलें थीं. अब भी उसके पास 1000 से ज्यादा ऐसी मिसाइलें बची होने का अनुमान है.

ड्रोन कमजोर पड़े, लेकिन विकल्प खुले

जंग के दौरान ईरान के वन-वे अटैक ड्रोन बेड़े को भी भारी नुकसान पहुंचा. उसकी ड्रोन क्षमता पहले के मुकाबले आधे से भी कम रह गई है. फिर भी अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि ईरान रूस जैसे सहयोगियों से नई तकनीक या हथियार हासिल कर सकता है. यानी उसकी हमलावर क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा सकती.

‘ईरान जल्दी वापसी कर सकता है’

मध्य पूर्व मामलों के जानकार केनेथ पोलैक ने कहा कि ईरान ने पहले भी कई बार तेजी से खुद को फिर से खड़ा किया है. उनके मुताबिक, ‘ईरान ने साबित किया है कि वह जल्दी इनोवेट करता है और अपनी सैन्य ताकत को दोबारा तैयार कर सकता है। वह क्षेत्र की ज्यादातर सेनाओं से ज्यादा मजबूत प्रतिद्वंद्वी है.’

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जंग थमी, लेकिन साया बाकी

अमेरिका और इजरायल ने इस जंग में 13 हजार से ज्यादा हथियारों का इस्तेमाल किया. निशाने पर मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज, नौसैनिक ठिकाने और रक्षा फैक्ट्रियां रहीं. इसके बावजूद, ईरान की मिसाइल लॉन्च क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई. जंग के दौरान जहां वह रोज दर्जनों मिसाइलें दाग सकता था, अब यह क्षमता घटकर 10-15 मिसाइल प्रतिदिन तक आ गई है.

बातचीत पर भी मंडरा रहा खतरा

अमेरिका अब युद्धविराम को स्थायी बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए बातचीत में जुटा है. लेकिन ईरान की बची हुई मिसाइल ताकत इस पूरी प्रक्रिया पर लंबा साया डाल रही है. यानी बंदूकें भले शांत हों, लेकिन जमीन के नीचे छिपी मिसाइलें अब भी इस संघर्ष का सबसे बड़ा अनसुलझा खतरा बनी हुई हैं.




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