ईरान-US में फिर छिड़ी जंग तो दुनिया के सामने क्या होंगी चुनौतियां, LPG संकट को लेकर भारत कितना तैयार?

Latest and Breaking News on NDTV ईरान-US में फिर छिड़ी जंग तो दुनिया के सामने क्या होंगी चुनौतियां, LPG संकट को लेकर भारत कितना तैयार?


ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता फेल हो गई है. सीजफायर के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में 20 घंटे से ज्यादा चली शांति वार्ता बेनतीजा रही. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वापस अमेरिका चले गए. इस बीच मिडिल ईस्ट में हालात फिर से गंभीर होते जा रहे हैं. ईरान अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. वहीं अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का दबाव बना रहा है. ऐसे में ईरान-अमेरिका युद्ध एक नाजुक मोड़ पर है. सीजफायर के और शांति वार्ता की खबर के बाद दुनिया के कई देशों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब युद्ध का संकट और गहराता जा रहा है. अगर दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध शुरू होता है, तो दुनियाभर की इकॉनमी इससे प्रभावित होगी. कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, वो और भी बढ़ सकती हैं. आइए बताते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में संकट बढ़ता है, तो दुनिया के आगे क्या-क्या चुनौतियां होंगी?

ईरान कब तक युद्ध में टिक पाएगा?

फिर से युद्ध के खतरे के बीच पहला और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान फिर युद्ध के जोखिम को झेलने के लिए तैयार है? ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता को बचाए रखना और गिरती अर्थव्यवस्था को संभालना है. इस जंग की शुरुआत में ही इजरायल-अमेरिका के हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी. ईरान में फिलहाल एक अस्थाई नेतृत्व सत्ता संभाल रहा है.

इसके अलावा ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती इकॉनमी को संभालना है. युद्ध की वजह से ईरान के तेल निर्यात में 45 फीसदी की गिरावट आई है. भले ही तेल की कीमतें बढ़ने से उसे थोड़ी राहत मिली है, लेकिन अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों की वजह से उसका व्यापार सीमित है.

रही बात इस युद्ध के जोखिम को उठाने की तो ईरान की असली ताकत उसके ड्रोन, मिसाइल और प्रॉक्सी संगठन हैं. ईरान पूरे मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत हिज्बुल्लाह, हमास और हूती विद्रोहियों के दम पर दिखता है. भले ही अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों को तबाह कर दिया है, लेकिन अभी भी ईरान के प्रॉक्सी बचे हुए हैं. अगर हिज्बुल्लाह और हूती और हमास एक्टिव होते हैं, तो युद्ध की आग और ज्यादा भड़केगी. ईरान के पलटवार से अमेरिका और इजरायल को भी काफी कॉस्ट इम्पोजिशन का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ईरान अभी भी युद्ध लड़ने की ताकत रखता है.

अमेरिका की क्या चुनौतियां?

अमेरिका के लिए यह युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती भी बन गया है. भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हों कि उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को तबाह कर दिया है, लेकिन ईरान का ताबड़तोड़ पलटवार दुनिया देख रही है. ईरान ने जिस तरह से मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया उसने अमेरिका की चिंता जरूर बढ़ा दी. ट्रंप युद्ध को जल्द खत्म करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका एक सम्मानजनक ऑफ-रैंप यानी बाहर का रास्ता खोजने के लिए संघर्ष कर रहा है.

दुनिया के लिए क्या चुनौती?

अगर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू होता है, तो दुनिया के कई देश इसका खामियाजा भुगतेंगे. इसकी वजह है होर्मुज स्ट्रेट. ईरान इस बार होर्मुज में अपना कंट्रोल और ज्यादा बढ़ा सकता है. यहां से जहाजों का निकलना मुश्किल होगा. पूरी दुनिया का 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है.मार्च 2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. ऊर्जा के अलावा एल्युमीनियम, उर्वरक और हीलियम जैसी वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हुई है. अगर फिर युद्ध छिड़ता है तो कच्चे तेल की कीमत और भी ज्यादा बढ़ सकती है और पूरी दुनिया महंगाई की मार को झेलेगी. 

ये भी पढ़ें : ईरान प्री-वॉर कंडीशन चाह रहा था… ट्रंप के ऑफर को कर दिया ‘ना’- पाकिस्तानी पत्रकार ने बता दी अंदर की बात

भारत के लिए भी टेंशन की बात?

ईरान युद्ध और होर्मुज संकट का असर भारत पर भी होगा. भारत भी अपने कच्चे तेल और रसोई गैस का लगभग 60 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है. ऐसे में इसका सबसे ज्यादा असर रसोई गैस पर देखने को मिलेगा. पहले से ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी देखी जा रही है. कई जगहों से ब्लैक मार्केटिंग की भी खबरें आई हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि अभी देश में गैस या तेल की कोई कमी नहीं है. लेकिन अगर लंबे वक्त तक युद्ध खिंचता है, तो भारत में एलपीजी की कमी हो सकती है. सरकार LPG पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप से गैस सप्लाई PNG का नेटवर्क तेजी से फैला रही है. इसके अलावा सरकार रूस और अन्य देशों से तेल खरीद के लिए नए मार्ग तलाश रही है.

यह भी पढ़ें: ईरान से शांति वार्ता पर टिकी थीं ट्रंप की नजरें, 21 घंटों में जेडी वेंस ने किए दर्जनों कॉल





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *