बनकर ट्रंप का ‘जमूरा’, आर्मी चीफ मुनीर पाकिस्तान पर कसते जा रहे शिकंजा

बनकर ट्रंप का 'जमूरा', आर्मी चीफ मुनीर पाकिस्तान पर कसते जा रहे शिकंजा बनकर ट्रंप का 'जमूरा', आर्मी चीफ मुनीर पाकिस्तान पर कसते जा रहे शिकंजा

पाकिस्तान में लोकतंत्र है या सैन्यतंत्र? अबतक तो सिर्फ आरोप लग रहे थे कि पाकिस्तानी सरकार की असली कमान आर्मी चीफ आसिम के हाथ में है, लेकिन अब यह पूरी तरह साबित भी हो गया है. शनिवार को जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में ईरान के साथ अहम बातचीत के लिए पहुंचे, तो उनका स्वागत पाकिस्तान के ताकतवर सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने किया. खास बात थी कि मुनीर सिविल कपड़ों में थे और बाकी लोगों जैसे ही दिख रहे थे. यह तस्वीर दिखा रही थी कि अब आसिम मुनीर पाकिस्तान की विदेश नीति में बहुत बड़ा रोल निभा रहे हैं.

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा ने कहा कि मुनीर अब एक सैनिक, नेता और राजनयिक तीनों की भूमिका में दिख रहे हैं. इस्लामाबाद में मुनीर हर जगह मुख्य भूमिका में थे. उन्होंने खुद दोनों देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और वेंस के साथ दोस्ताना व्यवहार दिखाया. जेडी वेंस को रिसीव करते समय मुनीर आगे-आगे चल रहे थे और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार पीछे-पीछे. यह तस्वीर अपने आप में पाकिस्तान की जमीनी हकीकत बयान कर रही थी.

ट्रंप के करीब आते मुनीर

पाकिस्तान और अमेरिका का रिश्ता पहले उतार-चढ़ाव भरा रहा है. कई बार अमेरिका ने पाकिस्तान की आलोचना की, खासकर जब सेना ने वहां कि सरकारों का तख्तापलट किया. हालांकि अब जब सेना ने अप्रत्यक्ष तौर पर सरकार पर कब्जा कर लिया है, तब अमेरिका की मौजूदा सरकार को यह सिस्टम ही रास आ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर मुनीर को अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” कहते हैं. पिछले साल जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान को धूल चटाई थी तो उसके बाद से ट्रंप और मुनीर का रिश्ता और परवान चढ़ने लगा. वजह थी कि पाकिस्तान वही बोली बोल रहा था जो ट्रंप चाहते थे. पाकिस्तान ट्रंप को शांतिदूत दिखा रहा था जबकि भारत ने बार-बार साफ किया कि सीजफायर में किसी तीसरे देश का हाथ नहीं था.

उस समय पाकिस्तान ने ट्रंप की बहुत तारीफ की और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया. अमेरिका और ईरान के बीच इस वीकेंड की लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई. वेंस ने कहा कि वह बिना डील के लौट रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि वह आगे भी बातचीत में मदद करता रहेगा. खास बात रही कि पीएम शरीफ खुद मुनीर के कसीदे पढ़ते नजर आए. शरीफ ने कहा, “फील्ड मार्शल मुनीर ने बहुत मेहनत की और युद्ध को शांत करने और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में बड़ा और ऐतिहासिक रोल निभाया.”

पाकिस्तान पर मुनीर का शिकंजा कस रहा

मुनीर का पाकिस्तान में दबदबा वहां सेना की बढ़ती ताकत के साथ जुड़ा हुआ है. मुनीर ने खुद के लिए कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) ले ली है और उन्हें लंबा कार्यकाल मिला है. सेना का सरकार चलाने में भी असर बहुत ज्यादा बढ़ा है. आलोचक और पाकिस्तानी विपक्ष कहते हैं कि इन बदलावों से देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जो पहले सेना के करीब थे और बाद में उसके खिलाफ बोले, अब जेल में हैं.

सेना ने बार-बार कहा है कि उसका इमरान खान के मामलों या सरकार के काम में कोई दखल नहीं है. लेकिन सच्चाई इससे अलग नजर आती है. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट शुजा नवाज ने कहा कि पाकिस्तानी सेना का अब वहां की अर्थव्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर पहले से ज्यादा नियंत्रण है.

पाकिस्तान के पैदा होने के बाद से ही वहां कई बार सेना ने सत्ता संभाली है. विदेश नीति हमेशा से सेना के लिए अहम रही है. विदेशी नेता अक्सर राजधानी के पास रावलपिंडी में सेना प्रमुख से मिलने को जरूरी मानते हैं. वह जानते हैं कि पाकिस्तान में कंट्रोल असल में किसके हाथ में है. मुनीर पहले खुफिया प्रमुख थे और उन्हें 2022 में सेना प्रमुख बनाया गया. शुरुआत में वे कम दिखाई देते थे, लेकिन अब पाकिस्तान पर उनका कंट्रोल साफ नजर आता है. नवाज ने कहा, “मुनीर पहले के आर्मी चीफ से ज्यादा सीधे तौर पर सरकार और विदेश नीति में शामिल हैं.”

मुनीर जून में शहबाज शरीफ के साथ वॉशिंगटन गए थे और ट्रंप के साथ लंच किया था. उस मुलाकात के बाद दोनों के बीच रिश्ता और मजबूत हुआ. ट्रंप ने मीडिया से कहा था कि मुनीर को ईरान की बहुत अच्छी समझ है. एक्सपर्ट हसन अब्बास ने कहा कि ट्रंप के साथ मुनीर की तस्वीरें और मुलाकात ने उनकी छवि बदल दी है.

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