सरकारी नौकरी: क्या पिता की मौत के बाद बेटे को मिलेगी वही बड़ी कुर्सी? जानें ‘अनुकंपा नियुक्ति’ का सच

सरकारी नौकरी: क्या पिता की मौत के बाद बेटे को मिलेगी वही बड़ी कुर्सी? जानें 'अनुकंपा नियुक्ति' का सच सरकारी नौकरी: क्या पिता की मौत के बाद बेटे को मिलेगी वही बड़ी कुर्सी? जानें 'अनुकंपा नियुक्ति' का सच

Compassionate Appointment Process : सरकारी नौकरी न केवल एक करियर है, बल्कि पूरे परिवार की सुरक्षा का आधार होती है. लेकिन अगर सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु हो जाए, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. ऐसी स्थिति में सरकार ‘अनुकंपा नियुक्ति’ (Compassionate Appointment) का प्रावधान देती है. 

क्या होती है अनुकंपा नियुक्ति?

इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारी के निधन के बाद उसके परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से बचाना है. यह कोई ‘अधिकार’ नहीं है, बल्कि सरकार की तरफ से एक मानवीय सहायता है, ताकि परिवार की आजीविका चलती रहे.

क्या होती है Eligibility ?

केवल पति/पत्नी, बेटा, अविवाहित बेटी या कुछ विशेष मामलों में दत्तक संतान ही इसके पात्र होते हैं.

विभाग यह चेक करता है कि क्या परिवार के पास आय के अन्य साधन हैं? अगर परिवार के पास पहले से बहुत संपत्ति या अच्छी पेंशन है, तो आवेदन की स्थिति बदल सकती है.

विभाग के अनुसार, कर्मचारी की मृत्यु के बाद आमतौर पर 1 से 5 साल के भीतर आवेदन करना जरूरी है.

क्या वही सेम पोस्ट मिलती है?

जवाब है, नहीं. अनुकंपा नियुक्ति हमेशा ग्रुप ‘सी’ या ग्रुप ‘डी’ के पदों पर ही दी जाती है.

अगर पिता क्लास-1 अफसर थे, तो बेटे को सीधे वही पोस्ट नहीं मिलेगी.

उसे उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर क्लर्क, चपरासी या मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) जैसे पदों पर नियुक्त किया जा सकता है.

आवेदन की पूरी प्रक्रिया

सबसे पहले संबंधित विभाग के ऑफिस में जाकर निर्धारित फॉर्म भरें.

मृत्यु प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज, और परिवार की आय का विवरण जमा करें.

विभाग की एक ‘कमेटी’ इन दस्तावेजों की जांच करती है और परिवार की जरूरतों का आकलन करती है.

अगर रिक्त पद उपलब्ध हैं और योग्यता मेल खाती है, तो नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है.

 




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