ललितपुर में गर्भवती महिलाओं के हक पर ‘डाका’: आंगनबाड़ी केंद्र से बांटा गया एक्सपायर्ड पोषाहार

ललितपुर में गर्भवती महिलाओं के हक पर 'डाका': आंगनबाड़ी केंद्र से बांटा गया एक्सपायर्ड पोषाहार ललितपुर में गर्भवती महिलाओं के हक पर 'डाका': आंगनबाड़ी केंद्र से बांटा गया एक्सपायर्ड पोषाहार

UP News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के ललितपुर (Lalitpur) से स्वास्थ्य और प्रशासन के दावों की पोल खोलने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है. दरअसल, यहां के विकासखंड बिरधा के पंचा बंट गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र (Anganwadi Center) पर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया. सरकार की ओर से दी जाने वाली पौष्टिक सामग्री के नाम पर महिलाओं को एक्सपायरी डेट का पोषाहार बांट दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है.

मामला केवल खराब गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां राशन की चोरी और बड़े भ्रष्टाचार का भी खुलासा हुआ है. नियमों के अनुसार, प्रत्येक गर्भवती महिला को हर माह तेल, दाल, दलिया और पंजीरी सहित अन्य पोषक सामग्रियां मिलनी चाहिए. हालांकि, आंगनबाड़ी केंद्र पर मौजूद बारी और निहारिका जैसी लाभार्थी महिलाओं ने बताया कि उन्हें पिछले 6 महीनों से केवल पंजीरी के पैकेट थमाए जा रहे हैं, जबकि अन्य महत्वपूर्ण सामग्री वितरण रजिस्टर से गायब है.

मौके पर पहुंचे अधिकारी को भी मिले एक्सपायरी पैकेट

जैसे ही इस बड़ी लापरवाही की सूचना स्थानीय प्रशासन को मिली, नायब तहसीलदार ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की. जांच के दौरान केंद्र पर एक्सपायरी डेट के पैकेट बरामद हुए, जिन्हें तुरंत जब्त कर एक अलग स्थान पर रखवाया गया. इस गंभीर स्थिति की रिपोर्ट जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को भेजी गई, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया.

दोषियों के वेतन रोकने के आदेश

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) नीरज कुमार ने स्वयं गांव का दौरा किया और महिलाओं को संपूर्ण पोषाहार का वितरण सुनिश्चित कराया. उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निम्नलिखित कार्रवाई के आदेश दिए.

  •  ब्लॉक बिरधा की सीडीपीओ (CDPO) का वेतन रोकने के निर्देश.
  •  आंगनबाड़ी वर्कर और सहायिका के विरुद्ध वेतन कटौती की कार्रवाई.
  •  पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश.

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सरकार जहां एक ओर कुपोषण मुक्त भारत का सपना देख रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर इस तरह के मामले भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता को दर्शाते हैं. ललितपुर की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी तंत्र में कमी के कारण गरीबों और गर्भवती महिलाओं के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है. अब देखना यह है कि विभागीय कार्रवाई के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं पर कितनी लगाम लगती है.

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