प्रशांत महासागर में हलचल, क्या भारत की थाली से गायब होगी दाल-रोटी?

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Super El Nino 2026: भारत में पड़ रही बेहिसाब गर्मी (Heatwave) महज इत्तेफाक नहीं है. ये तो उस खतरे की पहली दस्तक है, जो सात समंदर पार से आ रहा है. यूरोप की मौसम एजेंसी ECMWF और हमारे अपने IMD ने खतरे की घंटी बजा दी है. साल 2026 के लिए मानसून की जो तस्वीर सामने आ रही है, वो काफी धुंधली है. अगर मानसून औसत से कम रहा, तो खरीफ की फसलों-चावल, दाल और गन्ने पर भारी गाज गिरेगी.

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खेती-किसानी पर संकट के बादल (Crisis Over Agriculture and Monsoon)

जब फसलें कम होंगी, तो जाहिर है कीमतें आसमान छुएंगी. RBI ने भी साफ कह दिया है कि अल नीनो का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा. मतलब ये कि अगर खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं, तो आपकी EMI भी कम नहीं होने वाली. ब्याज दरों में कटौती का ख्वाब फिलहाल भूल ही जाइए. ये एक ऐसा चक्र है, जिसमें आम आदमी का पिसना तय लग रहा है.

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गांव की मंदी और शहर की बेबसी (Rural Distress and Global Supply Chain)

भारत की तरक्की का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है. हमारे ज्यादातर किसान आज भी मानसून के रहम-ओ-करम पर हैं. अगर बारिश ने दगा दिया, तो ग्रामीण इलाकों की कमाई बिल्कुल ठप हो जाएगी. इसका सीधा असर ऑटोमोबाइल से लेकर साबुन-तेल बेचने वाली कंपनियों तक पर पड़ेगा और ऊपर से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का तनाव. कच्चा तेल और खाद की सप्लाई पहले ही डांवाडोल है. ये सब मिलकर एक ऐसी खिचड़ी पका रहे हैं, जो आम आदमी के लिए हजम करना मुश्किल होगा.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)






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