Nepal Bhansar Tax: भारत और नेपाल भले ही दो अलग‑अलग भौगोलिक इकाइयां और दो अलग‑अलग देश हैं, लेकिन दोनों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं. खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों में भारत और नेपाल के रिश्ते को अक्सर ‘रोटी-बेटी’ का संबंध कहा जाता है. यानी दोनों देश की सामाजिक और पारंपरिक पहचान में एक दूसरे का गहरा पैठ है. हाल ही में नेपाल की नई-नवेली बालेन सरकार ने भारत से नेपाल ले जाने वाले सामानों पर भंसार टैक्स यानी कस्टम ड्यूटी लगा दी है. इसके बाद भारत और नेपाल की पारंपरिक संबंधों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.
एनडीटीवी की टीम ने बिहार के रक्सौल बॉर्डर पर जाकर वहां के हालात देखे. ये इलाका भारत‑नेपाल सीमा पर बसा है. नेपाल के सीमावर्ती इलाकों, खास तौर पर बीरगंज से हर दिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने के लिए भारतीय बाजार रक्सौल आते हैं. लेकिन इन दिनों इस आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है.
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नेपाल के लोगों को क्या परेशानी आ रही है?
इन नियमों का सीधा असर रक्सौल बाजार पर पड़ा है. नेपाली ग्राहकों की संख्या में साफ गिरावट आई है. वहीं नेपाल के नागरिकों में भी इस फैसले को लेकर नाराज़गी है. उनका कहना है कि वे वर्षों से रक्सौल बाजार से किराना, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान खरीदते रहे हैं, जो नेपाल की तुलना में यहां सस्ता पड़ता था.
हमने बीरगंज से आईं सिमरन मंडल से बात की. उन्होंने बताया कि वे अक्सर रक्सौल से चावल, दाल, मसाले और अन्य किराना सामान खरीदती हैं क्योंकि नेपाल में ये सब महंगे हैं. नए नियमों से उन्हें परेशानी हो रही है, क्योंकि भंसार कटवाने में समय भी लगता है और पैसे भी ज्यादा देने पड़ते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि रक्सौल और बीरगंज का रिश्ता हमेशा से रोटी‑बेटी का रहा है. शादी‑ब्याह के लिए कपड़े, राशन और घरेलू सामान लोग यहीं से लेते रहे हैं. लेकिन अब इन नियमों के चलते न सिर्फ व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि भारत‑नेपाल के पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ रहा है.

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किन सामानों पर कितना टैक्स?
नए नियमों के बाद अब भंसार के साथ‑साथ 13 प्रतिशत वैट भी देना पड़ रहा है. इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 15 से 20 प्रतिशत भंसार, किराना सामान पर करीब 10 प्रतिशत, मशीनरी आइटम्स पर 15 से 30 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है.
इसके अलावा सिगरेट, मांस, मछली और अचार जैसे सामान ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. लोग बताते हैं कि पहले जहां बिना ज्यादा रोक‑टोक के खरीदारी हो जाती थी, अब भंसार कटवाने में आधे से एक घंटे तक का समय लग रहा है और खर्च भी काफी बढ़ गया है.
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