नई दिल्ली:
किसकी किस्मत कब पलट जाए कहा नहीं जा सकता. पश्चिम बंगाल की औसग्राम सीट से नई बीजेपी विधायक की यही कहानी है.कल तक जो 4 घरों में बर्तन माजकर महज 2500 रुपये प्रति माह कमा रही थी, अब वह एक विधानसभा सीट से विधायक है. संघर्ष और सामाजिक उत्थान की एक प्रेरणादायक कहानी में, पश्चिम बंगाल की औसग्राम (एससी) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार कलिता माझी ने जीत दर्ज की है. यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक—दोनों ही स्तरों पर एक बड़ी उपलब्धि है.
कौन हैं कलिता माझी?
कलिता माझी पहले घरेलू कामगार या कहें एक मेड के रूप में काम करती थीं और महीने में सिर्फ 2,500 रुपये कमाती थीं. अब वह विधानसभा सदस्य (MLA) चुनी गई हैं. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को 12,535 वोटों के अंतर से हराया है. उनकी जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं है, बल्कि मुश्किल हालात के बावजूद हार न मानने की कहानी है. बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली कलिता माझी आर्थिक तंगी की वजह से औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर सकीं.परिवार की मदद के लिए उन्हें कई घरों में घरेलू काम करना पड़ा. आज उनकी यह सफलता कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई है.कलिता माझी काशेमनगर (मंगलकोट) की निवासी हैं और एक बड़े परिवार से आती हैं.सात बहनें और एक भाई.उनके दिवंगत पिता दिहाड़ी मजदूर थे और परिवार की आर्थिक तंगी ने उनके शुरुआती जीवन को काफी हद तक प्रभावित किया.
2021 में भी लड़ा था चुनाव
उनके पति प्लंबर का काम कर परिवार का गुजारा करते हैं.दोनों ने मिलकर कई वर्षों तक आर्थिक संघर्षों का सामना किया, साथ ही अपने बेटे पार्थ की परवरिश भी की, जो फिलहाल कक्षा आठ में पढ़ रहा है. कलिता माझी ने इससे पहले 2021 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, बीजेपी नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और 2026 में उन्हें दोबारा मौका दिया जो अब सही साबित हुआ है.
पूर्व बर्धमान जिले की औसग्राम विधानसभा सीट से उनकी जीत को व्यापक रूप से जमीनी स्तर के नेताओं को आगे बढ़ाने और आम लोगों से जुड़े चेहरों को अवसर देने के बीजेपी के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.उनकी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी. एल. संतोष ने कलिता माझी को बधाई दी और कहा कि पार्टी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रतिभा और मेहनत को पहचानती है. पार्टी के भीतर भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर पहले से ही उत्साह था.स्थानीय कार्यकर्ता उन्हें एक ऐसा चेहरा मानते थे, जो आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को अच्छी तरह समझती हैं.
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