नई दिल्ली:
अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को बृहस्पतिवार को चीन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया. यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब भारत एवं चीन पूर्वी लद्दाख में चार वर्ष से अधिक समय तक बने रहे सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास कर रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोराईस्वामी के शीघ्र ही नया कार्यभार संभालने की संभावना है.
गलवान घाटी में 2020 के सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन ने पिछले कुछ महीनों में अपने संबंधों को स्थिर करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. इस गतिरोध ने पिछले कई दशकों में दोनों देशों के संबंधों को सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था. यह सैन्य गतिरोध अक्टूबर 2024 में प्रभावी रूप से समाप्त हुआ.दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और इतिहास में स्नातकोत्तर दोराईस्वामी ने भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने से पहले एक वर्ष तक पत्रकार के रूप में कार्य किया था.
उन्हें दो साल के कार्यकाल के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध किया गया. बाद में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्य किया.दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मिशन और जोहानिसबर्ग स्थित महावाणिज्य दूतावास में भी सेवाएं दीं.वह जुलाई 2011 में नयी दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय लौटे जहां उन्होंने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) प्रभाग का नेतृत्व किया.
दोराईस्वामी अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक विदेश मंत्रालय के अमेरिका प्रभाग में संयुक्त सचिव रहे. उन्हें अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया. इसके बाद अप्रैल 2015 में उन्हें कोरिया गणराज्य में भारत का दूत नियुक्त किया गया.यह कार्यकाल पूरा करने के बाद वह जुलाई 2018 में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय लौटे, जहां उन्होंने बांग्लादेश और म्यांमा प्रभाग के प्रमुख के रूप में सेवाएं दीं.इसके बाद उन्हें दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और शिखर सम्मेलनों के लिए जिम्मेदार अतिरिक्त सचिव बनाया गया.
ब्रिटेन में कार्यभार संभालने से पहले दोराईस्वामी ने अक्टूबर 2020 से 18 सितंबर 2022 तक बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया.उन्होंने 23 सितंबर 2022 को ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर कार्यभार संभाला.दोराईस्वामी मंदारिन, फ्रेंच और थोड़ी बहुत कोरियाई भाषा बोलते हैं.
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