प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई वर्ष 2002 के पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा संजीव अरोड़ा से जुड़े आवासों और कार्यालयों पर चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान के बाद की गई. अब इस पूरे मामले पर संजीव अरोड़ा की कंपनी की ओर से भी बयान सामने आया है.
संजीव अरोड़ा की कंपनी ने ऑफिशल स्टेटमेंट जारी कर दावा किया है कि जितने भी फोन एक्सपोर्ट किए गए हैं. उन सबके IMEI नंबर पहले ही एक्टिव है. कंपनी ने कहा कि एक सवाल जरूर उठ रहा है कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओं और आम आदमी पार्टी से जुड़े चेहरों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई अचानक क्यों तेज हो जाती है. पंजाब के लोगों में यह भावना लगातार मजबूत हो रही है कि केंद्र की भाजपा सरकार अब राजनीतिक लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के सहारे लड़ना चाहती है.
अब संजीव अरोड़ा की कंपनी ने दावा किया कि ईडी ने अपने दस्तावेजों में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड, कुछ बैंक खातों, कारोबारी लेनदेन और कथित फर्जी मोबाइल फोन निर्यात का जिक्र किया है. एजेंसी का दावा है कि लगभग 157 करोड़ रुपये के बोगस मोबाइल एक्सपोर्ट और विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के उल्लंघन की जांच की जा रही है. लेकिन कार्रवाई के तुरंत बाद कंपनी ने 9 मई 2026 को आधिकारिक प्रेस बयान जारी कर ईडी के आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया.
कंपनी ने ऑफिशल स्टेटमेंट में कहा कि उसे देश की न्यायपालिका, संविधान और कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और वह हर जांच में पूरा सहयोग कर रही है. कंपनी के मुताबिक उसने मई 2023 में मोबाइल फोन निर्यात का कारोबार शुरू किया था, जो भारत सरकार की “मेक इन India” और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत तेजी से बढ़ रहे मोबाइल निर्यात सेक्टर का हिस्सा था.
कंपनी का दावा है कि उसने 44 हजार से ज्यादा असली मोबाइल फोन और मोबाइल उपकरण विदेश भेजे, जिनमें एप्पल आईफोन, एयरपॉड्स, सैमसंग और वनप्लस जैसे बड़े ब्रांड शामिल थे. कंपनी के अनुसार हर मोबाइल फोन का IMEI नंबर कस्टम विभाग द्वारा पोर्ट पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्कैन और सत्यापित किया गया था. कंपनी का कहना है कि IMEI स्कैनिंग एक इलेक्ट्रॉनिक वेरिफाइड प्रक्रिया है, जिसे फर्जी साबित करना आसान नहीं है.
हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने यह भी कहा कि विदेश भेजे गए ज्यादातर मोबाइल फोन दूसरे देशों में एक्टिव हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि पूरा निर्यात वास्तविक था. कंपनी के अनुसार एप्पल और दूसरी कंपनियों ने भी उपकरणों की प्रामाणिकता की पुष्टि की है.
कंपनी ने फर्जी निर्यात और पैसों की हेराफेरी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सप्लायर्स को सभी भुगतान जीएसटी समेत बैंकिंग चैनलों के जरिए किए गए. निर्यात से आने वाला पैसा भी पूरी तरह बैंकिंग माध्यमों से प्राप्त हुआ. कंपनी का कहना है कि हर लेनदेन का रिकॉर्ड मौजूद है और किसी भी स्तर पर कैश या अवैध ट्रांजैक्शन नहीं हुआ.
जीएसटी विवाद को लेकर भी कंपनी ने अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा. कंपनी के मुताबिक कुछ सप्लायर कंपनियों पर आरोप लगे थे, लेकिन वह सप्लायर स्तर का मामला था. कंपनी ने खुद को पीड़ित बताते हुए कहा कि उसने इस मामले में लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में FIR दर्ज करवाई थी. कंपनी का कहना है कि विवादित टैक्स राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है और मामला अपीलीय प्राधिकरण में लंबित है.
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