Office romance survey results: क्या आपके दफ्तर में भी कोई ऐसा है, जिसे देखकर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं? अगर हां, तो संभल जाइए. ऑफिस रोमांस को लेकर आई एक ताजा रिपोर्ट ने वर्कप्लेस के ‘इश्क’ का ऐसा काला चिट्ठा खोला है कि, अच्छे-अच्छों के पसीने छूट गए हैं. यकीन मानिए, गॉसिप से ज्यादा इस सर्वे में छिपे ‘धोखे’ के आंकड़े आपको हैरान कर देंगे. दफ्तर की नौ घंटे की शिफ्ट और बाहर की सिमटती दुनिया ने अब सहकर्मियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है. ऑफिस के कोने में होने वाली वो गुफ्तगू अब सिर्फ काम तक सीमित नहीं रही.
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दफ्तर का प्यार कहीं पड़ न जाए भारी (Workplace affairs and cheating)
फोर्ब्स की एक ताजा रिपोर्ट ने इस पर से पर्दा उठाया है, जिसके मुताबिक 60 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी जिंदगी में कभी न कभी ऑफिस वाली मोहब्बत के चक्कर में पड़ चुके हैं. लोग मानते हैं कि जब बाहर किसी से मिलने का वक्त ही नहीं मिलता, तो डेस्क के पास बैठा साथी ही सबसे ‘कंफर्टेबल’ लगने लगता है. सर्वे कहता है कि करीब 65 प्रतिशत लोगों को दफ्तर में पार्टनर ढूंढना इसलिए पसंद आता है, क्योंकि वहां एक-दूसरे की प्रोफेशनल दिक्कतों को समझने वाला हमदर्द मिल जाता है, लेकिन ठहरिए…ये दास्तान जितनी हसीन दिखती है, उतनी है नहीं.

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वफादारी में सेंध और गॉसिप का बाजार (Office Affairs and Workplace Cheating Stats)
इस रिपोर्ट का सबसे सनसनीखेज हिस्सा वो है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. ऑफिस रोमांस में शामिल होने वाले 40 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि, उन्होंने अपने पार्टनर को किसी दूसरे सहकर्मी के साथ ‘चीट’ किया है, यानी वफादारी के वादे ऑफिस की राजनीति और रंजिशों के बीच दम तोड़ रहे हैं. ऊपर से 60 फीसदी लोगों का कहना है कि, जैसे ही अफेयर का पता चलता है, सहकर्मियों का नजरिया और गॉसिप करने का अंदाज बदल जाता है.
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इतना ही नहीं, 54 फीसदी लोग मानते हैं कि दफ्तर की इस डेटिंग ने उनके वर्क-लाइफ बैलेंस का कबाड़ा कर दिया है. ब्रेकअप हो जाए तो रोजाना उसी शख्स का चेहरा देखना किसी सजा से कम नहीं लगता.

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शादी की शहनाई और एचआर की सख्ती (HR Policies on office romance)
हालांकि, हर कहानी का अंत बुरा नहीं होता. इस सर्वे में एक राहत भरी खबर भी है कि 43 फीसदी लोगों ने अपने ऑफिस वाले साथी के साथ सात फेरे भी लिए हैं. कंपनियां भी अब इस हकीकत को भांप रही हैं. करीब 62 फीसदी कर्मचारियों ने अपने रिश्ते की जानकारी ईमानदारी से HR को दे दी थी, ताकि आगे चलकर कोई कानूनी या प्रोफेशनल पचड़ा न फंसे. अब कई संस्थान इसे गलत मानने के बजाय बेहतर तरीके से मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि दफ्तर का माहौल न बिगड़े.
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)


