सोना, जमीन या बैंक डिपॉजिट… पैसा कहां रहे तो इकोनॉमी को होगा फायदा? ये गणित समझ लेना जरूरी

सोना, जमीन या बैंक डिपॉजिट... पैसा कहां रहे तो इकोनॉमी को होगा फायदा? ये गणित समझ लेना जरूरी सोना, जमीन या बैंक डिपॉजिट... पैसा कहां रहे तो इकोनॉमी को होगा फायदा? ये गणित समझ लेना जरूरी

PM Modi on Gold Purchase: देश में सोना सिर्फ पहनने भर के लिए नहीं है, बल्कि लोगों का भरोसा भी है. शादी हो या त्योहार, ज्यादातर लोग सबसे पहले सोना खरीदने के बारे में ही सोचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसमें निवेश सेफ रहता है. लेकिन सच्चाई ये है कि जब लोग बहुत ज्यादा सोना खरीदते हैं, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से तेल महंगा हो गया है और भारत को तेल और सोना खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर देने पड़ रहे हैं. इससे देश के पैसे पर दबाव बढ़ता है. इसी वजह से पीएम मोदी देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि एक साल तक सोना खरीदने से बचें. ऐसे हालात में हमें ये सोचना जरूरी है कि पैसा कहां लगाएं? सोने में, जमीन में या बैंक में. इस खबर में आप कई फैक्ट को जानकार हैरान रह जाएंगे.

बाजार की चाल से बाहक पैसा

पैसा तब काम का होता है जब वो चलता‑फिरता रहे. मान लीजिए आप 1 लाख रुपये बैंक में जमा करते हैं. बैंक उसी पैसे से किसी को घर, गाड़ी या बिजनेस का लोन देता है. इससे काम‑धंधा बढ़ता है, लोगों को रोजगार मिलता है और अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है. लेकिन अगर आप 1 लाख का सोना खरीदकर लॉकर में बंद कर देते हैं, तो वो पैसा वहीं रुक जाता है. अब उससे ना किसी को लोन मिल पाता है, ना कोई नया काम शुरू होता है. यानी ऐसा पैसा बाजार की चाल से बाहर हो जाता है और देश की अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं पहुंचाता.

देश की जीडीपी में जीरो कंट्रीब्यूशन

सोना अपने आप कोई सामान नहीं बनाता. जैसे जमीन लेने से खेती हो सकती है या घर बन सकता है और मशीन खरीदने से फैक्ट्री में माल तैयार होता है. लेकिन सोना बस तिजोरी या डिब्बे में पड़ा रहता है. उसकी कीमत दुनिया के बाजार में बढ़‑घट सकती है, पर उससे देश में ना तो प्रोडक्शन बढ़ता है और ना ही जीडीपी में फायदा होता है.

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विदेशी मुद्रा का बाहर जाना

भारत को जरूरत का ज्यादातर सोना विदेश से मंगवाना पड़ता है. जब हम सोना खरीदते हैं, तो बदले में हमारे में मौजूद डॉलर बाहर चला जाता है. ऊपर से जो सोना आता है, वो ज्यादातर लॉकर या तिजोरी में रख दिया जाता है. यानी वो पैसा देश की तरक्की वाले कामों जैसे सड़कें, स्कूल, अस्पताल या शिक्षा में इस्तेमाल ही नहीं हो पाता.

भारतीय घरों और मंदिरों में इतना सोना जमा है कि वो दुनिया के टॉप 10 बैंकों के कुल सोने से भी ज्यादा है. द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत के लोगों के पास करीब 50,000 टन सोना है, जिसकी कीमत लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर है. ये रकम अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के ज्यादातर देशों की जीडीपी से भी ज्यादा है. एसोचैम की रिपोर्ट में बताया कि भारत का 75 से 80 प्रतिशत सोना गहनों के रूप में रखा हुआ है, जिसे लोग बचत और परंपरा की तरह संभाल कर रखते हैं. अब लोग अपना सोना बेचते नहीं हैं, इसलिए सोने की कीमत बढ़ने‑घटने का उनके रोजमर्रा के खर्च पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. अगर यही सोना बैंकिंग सिस्टम या कारोबार में लगाया जाए, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और तेजी से आगे बढ़ेगी.

भारत कहां से खरीदता है सबसे ज्‍यादा गोल्‍ड

भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से खरीदता है. भारत में आने वाले कुल सोने का करीब 40% वहीं से आता है. इसके अलावा भारत दक्षिण अफ्रीका से करीब 10% और यूएई से 6% से थोड़ा ज्यादा सोना मंगाता है. यानी भारत के लिए सोने का सबसे बड़ा ठिकाना स्विट्जरलैंड है.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता

चीन के बाद भारत वो देश है जो सबसे ज्यादा सोने का इस्तेमाल करता है।. देश मे में सोने की जरूरत बाहर से मंगाकर पूरी की जाती है, क्योंकि लोग सबसे ज्यादा सोना गहने बनाने के लिए खरीदते हैं. हालांकि अब सोना सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक भी खरीद रहा है. दुनिया में जब हालात बिगड़ते हैं, तो देशों के रिजर्व बैंक सेफ रहने के लिए सोना जमा करते हैं. इसी वजह से आरबीआई भी अपना सोना बढ़ा रहा है और इससे भारत में सोने का इंपोर्ट और बढ़ गया है.

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