CBSE ने 40 करोड़ पेज की स्कैनिंग कैसे करवाई? सवालों पर बोर्ड ने कहा- जल्द देंगे जवाब

CBSE ने 40 करोड़ पेज की स्कैनिंग कैसे करवाई? सवालों पर बोर्ड ने कहा- जल्द देंगे जवाब CBSE ने 40 करोड़ पेज की स्कैनिंग कैसे करवाई? सवालों पर बोर्ड ने कहा- जल्द देंगे जवाब

CBSE On Screen Marking: CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब स्कैनिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई नेताओं और लोगों ने पूछा है कि जिस कंपनी को इसका ठेका दिया गया था, उसने कैसे करोड़ों कॉपियों की स्कैनिंग इतने कम वक्त में कर दी और इसका पूरा प्रोसेस क्या था. छात्रों की स्कैन कॉपी ब्लर होने, कॉपी की अदला-बदली और पेज गायब होने की शिकायतों के बाद इस तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस पूरे मामले पर जब एनडीटीवी ने CBSE से संपर्क किया तो बताया गया कि जल्द इसका जवाब दिया जाएगा. 

करोड़ों पेज की स्कैनिंग को लेकर सवाल

इस बार सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 17 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे. इन सभी छात्रों की करीब 90 लाख से ज्यादा कॉपियां बोर्ड ने ऑन स्क्रीन मार्किंग से चेक करवाईं. ज्यादातर कॉपियां 36-40 पेज की होती हैं, फिर छात्र सप्लीमेंट्री कॉपी भी लेते हैं. ऐसे में औसत लगाएं कि एक छात्र के 40 पेज स्कैन होते हैं तो करीब 40 करोड़ पेज स्कैन हुए होंगे. ऐसे में सवाल है कि कौन सी कंपनी है जिसने इतने पेज एक साथ स्कैन कर दिए.

दिल्ली के मशहूर शिक्षाविद केशव अग्रवाल ने भी यही सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की कॉपी स्कैन करने के लिए क्या ये कंपनी सक्षम है? हाल में कई छात्रों ने इस तरह की कई शिकायत की हैं कि उनके नंबर कम रह गए या गलत कॉपी स्कैन करके भेजी गई है. खुद CBSE ने वेदांत नाम के छात्र के मामले में गलती सुधार करते हुए शिकायत के बाद उसे दोबारा सही स्कैन कॉपी भेजी. 

इस मामले पर पूर्व चेयरमैन NCERT आरसी राजपूत कहते हैं कि सीबीएसई बड़ी संस्था है, अगर कहीं कुछ गलती हुई तो उसे सुधार करना चाहिए.  हालांकि जब इस मुद्दे पर CBSE की प्रवक्ता नीति शंकर से NDTV ने संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि CBSE जल्द इसका जवाब देगा, जवाब आने के बाद जानकारी को अपडेट किया जाएगा.

राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने CBSE के परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया. राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि जिस कंपनी COEMPT को ये जिम्मेदारी मिली वो 2019 में तेलांगाना में यही कारनामा कर चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि COEMPT को CBSE का ये ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया? कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया को दरकिनार करके इस कंपनी को ठेका दिया गया? 

CBSE पेमेंट गेटवे में मिली खामियां 

CBSE में री-चेकिंग के नाम पर कई छात्रों ने ज्यादा पैसे या दो-दो बार कट जाने की शिकायत की, जिसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार बैंकों के साथ बैठक की. CBSE के पेमेंट गेटवे सिस्टम में बड़े सुधार के संबंध में चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों -भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक के साथ बैठक की. इसमें गेटवे पेमेंट को कैसे सुधारा जाए ताकि इस तरह की शिकायत दोबारा न हो इसके संबंध में जरूरी निर्देश दिए गए. CBSE को निर्देश दिया गया है कि अगर किसी छात्र का पैसा गलत तरीके से कटता है तो उसके लिए ऑटोमैटिक रिफंड किया जाए. 

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