कोटक बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार, ED ने बताया पंचकूला निगम के 145 करोड़ स्कैम का मास्टरमाइंड

कोटक बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार, ED ने बताया पंचकूला निगम के 145 करोड़ स्कैम का मास्टरमाइंड कोटक बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार, ED ने बताया पंचकूला निगम के 145 करोड़ स्कैम का मास्टरमाइंड

Haryana:

पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने  कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. ED की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने 1 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम  की धारा 19(1) के तहत उसे गिरफ्तार किया. एजेंसी का दावा है कि नगर निगम के करोड़ों रुपये के सरकारी फंड की हेराफेरी के पीछे रची गई पूरी साजिश का वह प्रमुख मास्टरमाइंड था. बता दें,  इस मामले की जांच हरियाणा के पंचकूला स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो  द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी.

FIR में आरोप लगाया गया था कि कोटक महिंद्रा बैंक के कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों ने गहरी साजिश के तहत पंचकूला नगर निगम के लगभग 145 करोड़ रुपये के सरकारी फंड का गबन किया. शुरुआती जांच में बैंक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद मामला ED तक पहुंचा और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इसकी जांच शुरू की गई.

ED के सामने अब तक क्या तथ्य आए

ED की जांच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार नगर निगम के एक अधिकारी, बैंक अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों ने मिलकर सरकारी धन को अवैध तरीके से निकालने की योजना बनाई थी. जांच एजेंसी का कहना है कि कोटक महिंद्रा बैंक में ग्राहक संबंध प्रबंधक (Customer Relationship Manager) रहे दिलीप कुमार राघव और बैंक के तत्कालीन डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने नगर निगम पंचकूला के पूर्व वरिष्ठ लेखा अधिकारी विकास कौशिक के साथ मिलकर नगर निगम के नाम पर दो बैंक खाते खोले. आरोप है कि इन खातों को खोलने के लिए फर्जी और जाली प्राधिकरण दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था.

जांच के मुताबिक नगर निगम के असली बैंक खातों में मौजूद सरकारी धन को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर करने के लिए नकली फंड माइग्रेशन ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए गए. इन दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम के वास्तविक खातों से करोड़ों रुपये निकालकर उन अवैध खातों में भेज दिए गए, जिन्हें नगर निगम के नाम पर ही खोला गया था. इस तरह सरकारी खजाने का पैसा बिना किसी वैध अनुमति के एक संगठित नेटवर्क के जरिए दूसरी जगह पहुंचा दिया गया.

फर्जी खाते के जरिए पैसों के असली स्रोत को छिपाया

ED का कहना है कि फर्जी खातों में पहुंचाए गए पैसों को बाद में कई लोगों और संस्थाओं के जरिए घुमाया गया ताकि असली स्रोत को छिपाया जा सके. जांच में सामने आया है कि यह रकम राजत दहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसरों के खातों में भेजी गई. एजेंसी के अनुसार ये सभी लोग पुष्पिंदर सिंह के निर्देशों और नियंत्रण में काम कर रहे थे. जांच में यह भी पता चला है कि जिन बैंक खातों के जरिए नगर निगम के अधिकांश फंड की हेराफेरी हुई, उन खातों का वास्तविक नियंत्रण भी कथित तौर पर पुष्पिंदर सिंह के पास था.

ED ने दावा किया है कि फाइनेंसरों के खातों में पहुंचने के बाद इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा दोबारा पुष्पिंदर सिंह और उसकी पत्नी प्रीति ठाकुर तक पहुंचाया गया. इसके अलावा करोड़ों रुपये रियल एस्टेट कंपनियों और अन्य निजी व्यक्तियों को भी ट्रांसफर किए गए. एजेंसी का आरोप है कि यह सभी लेन-देन पुष्पिंदर सिंह के निर्देश पर किए गए ताकि सरकारी धन को अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाया जा सके और उसके स्रोत को छिपाया जा सके.

सरकारी धन को लूटने की एक सुनियोजित साजिश

जांच एजेंसी का मानना है कि यह कोई साधारण वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि सरकारी धन को लूटने के लिए रची गई एक सुनियोजित और संगठित साजिश थी. फर्जी दस्तावेज तैयार करना, नगर निगम के नाम पर अवैध खाते खोलना, सरकारी धन को उन खातों में स्थानांतरित करना और फिर कई स्तरों पर उसे घुमाकर निजी लोगों तथा कंपनियों तक पहुंचाना इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली का हिस्सा था.

गिरफ्तारी के बाद पुष्पिंदर सिंह को विशेष PMLA अदालत, पंचकूला में पेश किया गया. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 9 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है. अब वह 9 जून 2026 तक ED की कस्टडी में रहेगा. इस दौरान जांच एजेंसी उससे पूछताछ कर धन के पूरे प्रवाह, अन्य लाभार्थियों, संपत्तियों और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटाएगी.

145 करोड़ रुपये के इस घोटाले ने नगर निगमों में वित्तीय निगरानी, सरकारी खातों की सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित घोटाले से किस-किस व्यक्ति या संस्था को फायदा पहुंचा और सरकारी धन से खरीदी गई संपत्तियां कहां-कहां मौजूद हैं. फिलहाल ED की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और मामले में अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है.

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