होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम इन दिनों दुनिया का लगभग हर इंसान सुन चुका है. अमेरिका-इजरायल के हमले से पहले ही ईरान ने इसकी घेराबंदी कर दी थी और हमला होते ही उसे पूरी तरह चोक कर दिया. नतीजा पूरी दुनिया तेल और गैस की किल्लत से जूझने लगी. महज तीन हफ्तों में कई देशों में महंगाई अंगड़ाई लेने लगी और कई सरकारों को तेल-गैस की राशनिंग करनी पड़ गई. इन सबके के बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वो अपने मित्र देशों के लिए होर्मुज खोल देगा. क्या भारत के जहाज भी पार कर पाएंगे?
ईरान का भारत को लेकर दावा
मुंबई में आज ही ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायब मोतलघ ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का तेहरान का फैसला नई दिल्ली के साथ उसकी लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को दर्शाता है. मोतलघ ने कहा कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र और साझेदार रहा है और तेहरान के अधिकारी मौजूदा संघर्ष के बीच भारत में गैस की कमी की स्थिति को लेकर चिंतित थे. इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर पहुंचा, जो इस सप्ताह पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला दूसरा एलपीजी कैरियर बना. इससे पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था. अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की. दोनों जहाज महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति लेकर भारत पहुंचे.
जंग की शुरूआत और भारत की चुप्पी
ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को जब हमला किया और उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी तो भारत ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की. सोशल मीडिया से लेकर कूटनीति के गलियारों में भारत की इस चुप्पी पर चर्चाएं चलने लगी. मगर भारत हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा था. एक तरफ उसका सैन्य साझेदार इजरायल और बिजनेस साझेदार अमेरिका था तो दूसरी तरफ हमेशा से भारतीय संस्कृति से जुड़ा रहने वाला ईरान. दोनों पक्षों से करीबी संबंधों को देखते हुए भारत ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया. अचानक विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की और खामेनेई के निधन पर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए. यह घटना ईरान द्वारा अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय संघ को छोड़कर सभी जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा के तुरंत बाद हुई. फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उसी दिन एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने आज दोपहर ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की.

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भारत के इस व्यवहार से भी सब चकित रह गए. फिर लगा कि भारत ने रस्म अदायगी की है और खामेनेई की मौत की निंदा तो नहीं की. अमेरिका और इजरायल सहित दुनिया भारत की कूटनीति को तौलने में लगे रहे. 5 मार्च को ही फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा ऐसे विवादों का समाधान खोजने के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है.”
पीएम मोदी ने की ईरान के राष्ट्रपति से बात
फिर 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से बातचीत की. इस दौरान पीएम मोदी ने बढ़ते तनाव और नागरिक बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताते हुए शांति बहाली के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की पुरजोर अपील की. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और भारत शांति व स्थिरता की बहाली के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. PM मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से बात की और इलाके के गंभीर हालातों पर चर्चा की. बढ़ते तनाव, आम लोगों की जान जाने और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंच रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताई. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सामान व एनर्जी (तेल-गैस) के बिना किसी रुकावट आने-जाने की जरूरत भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. शांति और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और अपील की कि समस्याओं का हल बातचीत और कूटनीति से निकाला जाए.’ 12 मार्च तक विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से तीन बार फोन पर बातचीत कर चुके थे. जाहिर है भारत और ईरान के संबंध नॉर्मल कर दिए गए थे और तब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बात की.

पीएम मोदी के बात करते ही 14 मार्च को खबर आई कि भारत के दो मालवाहक जहाज शिवालिक और नंदा देवी ने ईरान-इजरायल युद्ध के कारण बेहद खतरनाक हो चुके होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है. इसके बाद 18 मार्च को जानकारी मिली कि भारत ने ईरान को चिकित्सा सहायता भेजी है. चिकित्सा उपकरण और दवाएं 18 मार्च को तेहरान के ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी को 18 मार्च को सौंप दी गई.
ईरानी राष्ट्रपति को पीएम मोदी से ये उम्मीद
फिर इस शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोन पर बातचीत हुई. इस बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों की निंदा की और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई भारी बाधा के मद्देनजर महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्गों को “खुला और सुरक्षित” रखने का आह्वान किया. ईरानी वार्ता के विवरण के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिमी एशियाई देशों को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि क्षेत्र में “विदेशी हस्तक्षेप के बिना” शांति और स्थिरता लाई जा सके. पेज़ेश्कियन ने ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत से आग्रह किया कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी “स्वतंत्र भूमिका” का उपयोग करे.
यूं ही नहीं तेहरान में चिंता
जाहिर है ईरान को रूस और चीन की तरह भारत से भी उम्मीदें हैं. भारत भी युद्ध में शामिल होने को छोड़कर ईरान को मानवीय सहायता देने में कोई कोर कसर नहीं रख रहा. साथ ही युद्ध को रुकवाने में अपरोक्ष रूप से कोशिश भी कर रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित खुद पीएम मोदी ने खाड़ी के कई देशों से खुद बात की है. अमेरिका और इजरायल से भी जाहिर है चैनल के माध्यम से बात हो ही रही होगी. यही कारण है कि ईरान अब खुलकर कह रहा है कि तेहरान के अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि भारत में तेल और गैस की किल्लत नहीं हो. दो देशों के बीच ऐसे संबंध बहुत कम ही देखने को मिलते हैं.
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