जंग के सबसे अहम 24 घंटे शुरू! ट्रंप के अल्टीमेटम से पहले होर्मुज खुलेगा या युद्ध और विकराल होगा?

जंग के सबसे अहम 24 घंटे शुरू! ट्रंप के अल्टीमेटम से पहले होर्मुज खुलेगा या युद्ध और विकराल होगा? जंग के सबसे अहम 24 घंटे शुरू! ट्रंप के अल्टीमेटम से पहले होर्मुज खुलेगा या युद्ध और विकराल होगा?

पिछले 24 दिन से जारी अमेरिका और ईरान के बीच की जंग में अगले 24 घंटे सबसे अहम साबित हो सकते हैं. जंग का रूप और मिडिल ईस्ट का भविष्य इन 24 घंटों में पूरी तरह बदल सकता है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि अगर उसने तेल-गैस व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को इस बीच पूरी तरह नहीं खोला तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करके उन्हें पूरी तरह तबाह कर देगा. यह 48 घंटे की समयसीमा एक दिन के अंदर खत्म हो रही है. अगर ईरान ट्रंप की चेतावनी के सामने झुकने से इनकार करता है, जैसा कि वो संकेत दे रहा है, और ट्रंप हमला करने का आदेश देते हैं तो जंग एक अगल ही चरण में प्रवेश कर जाएगी.

इसी बीच इजरायल ने चेतावनी दी है कि युद्ध कई हफ्तों तक और चल सकता है. इजरायल ने यह भी अब तक के सबसे स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह लेबनान में जमीनी अभियान चलाने का इरादा रखता है. यानी वह लेबनाने में अपनी सेना उतारेगा. इजरायल ने लेबनान के एक महत्वपूर्ण पुल को नष्ट कर दिया है और कहा कि वह ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को कुचल देगा.

ट्रंप की धमकी और उनपर दबाव

ट्रंप ने 28 फरवरी को दोनों देशों द्वारा शुरू किए गए युद्ध में इजरायल का उत्साहपूर्वक समर्थन किया था. लेकिन जैसे जैसे जंग आगे बढ़ रही है, ट्रंप अब राजनीतिक दबाव में हैं. ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और यह वृद्धि तेल-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई करने की कोशिशों का परिणाम है. शनिवार को ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी समाप्त नहीं करता, तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों को “पूरी तरह नष्ट” कर देगा. बता दें कि होर्मुज एक संकरा जलमार्ग है और खाड़ी में प्रवेश का रास्ता है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है.

ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट के समय के आधार पर भारत में यह समय सीमा मंगलवार सुबह 5.14 मिनट पर खत्म होगी. तब ईरान में भी मंगलवार की सुबह होगी और वॉशिंगटन में सोमवार की शाम होगी.

ईरान की सैन्य कमान ने इसका कड़ा जवाब दिया और कहा कि अगर ट्रंप ऐसा करते हैं, तो वह इजरायल के “बिजली संयंत्रों, ऊर्जा तथा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ढांचे” पर हमला करेगा. साथ ही उन खाड़ी देशों के बिजली संयंत्रों पर भी हमला करेगा, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं और उन कंपनियों पर भी जिनमें अमेरिकी शेयरहोल्डर्स हैं.

ईरान के सैन्य संचालन कमान ने चेतावनी दी, “अगर ईरान के बिजली संयंत्रों के बारे में अमेरिका की धमकियां लागू की जाती हैं… तो होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक हमारे नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता.” इस प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं।

ईरान की शक्तिशाली संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ ने चेतावनी दी कि पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को “वैध लक्ष्य माना जाएगा और उसे अपरिवर्तनीय रूप से नष्ट कर दिया जाएगा.” ईरान के ऊर्जा मंत्री ने भी कहा कि अमेरिका-इजरायल के हमलों से पहले ही ईरान की जल और ऊर्जा अवसंरचना को “भारी नुकसान” पहुंच चुका है.

ट्रंप की इन धमकियों से युद्ध का समर्थन करने वाले निर्वासित ईरानियों के बीच भी चिंता पैदा हुई है. 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से हटाए गए आखिरी शाह के बेटे रजा पहलवी ने अमेरिकी सरकार और इजराइल से अपील की कि वे “दमन की व्यवस्था” को निशाना बनाएं, लेकिन “ईरान की नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा करें, जिसकी हमारे लोगों को देश के पुनर्निर्माण के लिए जरूरत है.”

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