बिहार शिक्षा बोर्ड ने आज 12वीं कक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस साल तीनों स्ट्रीम को मिलाकर 85.19 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने सफलता पाई है. वहीं हर साल की तरह इस बार भी लड़कियां, लड़कों से आगे रही हैं. वहीं बिहार की अगर लिटरेसी रेट (साक्षरता दर) पर बात की जाए तो, लिटरेसी के मामले में बिहार कई राज्यों से पीछे है. बिहार में सरकार की और से ऐसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका मकसद बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना है और राज्य की लिटरेसी रेट में सुधार लाना है. आंकड़ों पर नजर डालें तो, बिहार की लिटरेसी रेट 74.3% है. पीरियोडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे (PLFS 2023-24) की लेटेस्ट ऑफ़िशियल रिपोर्ट के अनुसार बिहार की लिटरेसी रेट 74.3% पर हैं. यह 2011 की जनगणना में दर्ज 61.8% से काफी सुधार दिखाता है. लेकिन बिहार में अभी भारत में दूसरी सबसे कम लिटरेसी रेट है.
2030 तक 100% लिटरेसी का लक्ष्य
राज्य सरकार अलग-अलग एजुकेशनल सुधारों और ULLAS स्कीम जैसी सेंट्रल पहलों में हिस्सा लेकर 2030 तक 100% लिटरेसी का लक्ष्य रख रही है. ULLAS यानी अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी, केंद्र ने 2022 में शुरू की थी. इसके तहत घर-घर जाकर सर्वे करके 15 साल से ज़्यादा उम्र के उन लोगों की पहचान करना है, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं. उन्हें बेसिक लिटरेसी तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार कई तरह के योजनाएं चला रही हैं. इन्हींं में से एक योजना है-“मेधा दिवस” योजना . इस योजना के जरिए जो भी बच्चे बोर्ड एग्जाम में टॉप करते हैं, उन्हें इनाम में नकद राशि दी जाती है. इस साल तो बिहार शिक्षा बोर्ड ने ये राशि दोगुनी कर दी है.
बिहार बोर्ड परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल करने वाले छात्र को 2 लाख रुपये इनाम दिया जाएगा. पिछले साल ये राशि 1 लाख रुपये थी. दूसरे स्थान के टॉपर को 1.5 लाख रुपये, तीसरे स्थान पर आने वाले छात्र को 1 लाख रुपये और चौथे से दसवें स्थान के बीच आने वाले सभी छात्रों को 20 हजार रुपये राशि इनाम के तौर पर मिलेगी. साथ ही एक लैपटॉप भी दिया जाएगा.


