साइबर क्राइम पर लगेगी लगाम, हेल्पलाइन 1930 को AI से बनाया जाएगा और हाईटेक, जानिए कैसे होगा काम | cyber fraud Central Call Center will be built Helpline 1930 to be made high tech with AI

img पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए 12 श्रेणियों में दिए गए 'देवऋषि नारद पुरस्कार' | Devrishi Narad Awards Honour Excellence In Journalism Across 12 Categories


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर नकेल कसने के लिए साइबर हेल्पलाइन ‘1930’ को पूरी तरह से हाईटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त बनाने का बड़ा फैसला लिया है. इसके साथ ही राज्यों के कॉल सेंटर्स पर लंबित मामलों को सुलझाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय स्तर का सेंट्रल कॉल सेंटर’ भी स्थापित किया जाएगा. यह राष्ट्रीय कॉल सेंटर उन कॉलों को संभालेगा जिनका राज्य स्तर पर उत्तर नहीं दिया गया है और यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक पीड़ित को समय पर सहायता मिले और शिकायतों का तुरंत पंजीकरण हो.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय ने साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों को जल्दी सुलझाने के लिए जनवरी 2026 में एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया था. SOP यह पक्का करता है कि बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी और दूसरे स्टेकहोल्डर मिलकर काम करें, ताकि बैंकिंग सिस्टम में ब्लॉक हुए फंड को पीड़ित नागरिकों को जल्द से जल्द वापस किया जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को भी इस SOP को लागू करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही ‘सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CFCFRMS) के कामकाज की भी समीक्षा की गई. CFCFRMS के तहत बनाए गए ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ (MRM) और ‘शिकायत निवारण मॉड्यूल’ (GRM) की नियमित समीक्षा के निर्देश जारी किए गए. अब तक लगभग एक लाख नागरिकों को ‘मनी रेस्टोरेशन’ और ‘शिकायत निवारण’ सिस्टम से फायदा हुआ है.

AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

AI जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 1930 हेल्पलाइन सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक बनाया जाएगा. हेल्पलाइन पर कॉल करने वालों के लिए वेटिंग टाइम कम करने हेतु AI वॉयस एजेंट्स और वेबबॉट्स (WebBOT) का उपयोग किया जाएगा. जब मानव ऑपरेटर व्यस्त होंगे, तब AI सिस्टम तुरंत कॉल अटेंड करके पीड़ित से बुनियादी जानकारी और ट्रांजैक्शन डिटेल्स दर्ज कर लेगा.

कई भाषाओं में मिलेगी सुविधा

सिस्टम में विभिन्न भाषाओं का सपोर्ट जोड़ा जाएगा, जिससे देश के किसी भी कोने से कोई भी नागरिक अपनी स्थानीय भाषा में आसानी से शिकायत दर्ज करा सके.

रियल-टाइम टेलीकॉम ऑडिट

भारत सरकार टेलीकॉम स्तर पर वास्तविक समय में सिग्नलिंग ऑडिट कर रही है, ताकि अमान्य या फर्जी नंबरों (CLI डेटा) को तुरंत ब्लॉक किया जा सके और ‘डिजिटल अरेस्ट’ या अन्य बड़े घोटालों को रोका जा सके.

मनी रिस्टोरेशन सिस्टम

इस आधुनिकीकरण के तहत ‘मनी रिस्टोरेशन और शिकायत निवारण व्यवस्था’ (MRM/GRM) को और मजबूत किया जा रहा है,जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ (अपराध के तुरंत बाद का समय) में पैसे होल्ड कराने और पीड़ितों के खाते में वापस लाने की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाएगी.

कहां बनेगा सेंट्रल कॉल सेंटर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कॉल सेंटर बनाने का निर्देश दिया, ताकि राज्य स्तर पर अनसुलझी शिकायतों को देखा जा सके. इस कॉल सेंटर को दिल्ली में स्थापित किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें:- नई SIM लेने जा रहे हैं? तो अपना OTP या बायोमेट्रिक किसी के साथ शेयर न करें, हो सकते हैं धोखाधड़ी के शिकार

लेखक के बारे में

ऐश्वर्या जैन

विशेष संवाददाता




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *