क्या आपने कभी ऐसा आम देखा है, जो साल के 12 महीने फल देता हो? उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक किसान ने ऐसा ही ‘जादुई’ पेड़ तैयार कर लिया है, जिसमें एक ही समय पर बौर, कच्चे और पके आम लगे नजर आते हैं.
सोचिए, अगर आपके घर में ऐसा पेड़ हो जो सालभर आम दे… न गर्मियों का इंतजार, न बाजार का झंझट!
Saharanpur Evergreen Mango: गर्मियों का सीजन आते ही मार्केट में आमों की बहार आ जाती है, और जब बात आम की हो तो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का नाम सबसे पहले जुबां पर आता है. सहारनपुर अपने खास और लजीज आमों के लिए दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सहारनपुर में आम की एक ऐसी अनोखी किस्म भी है, जो सिर्फ गर्मियों में नहीं बल्कि पूरे 12 महीने फल देती है?
इस आम की खासियत और इसके पीछे के जादू को देखकर हर कोई दंग है. आइए जानते हैं इस अनोखे पेड़ की पूरी कहानी.
‘सदाबहार वैरायटी’ के नाम से मशहूर है यह पेड़
सहारनपुर के दिल्ली रोड स्थित प्रकृति कुंज के रहने वाले प्रगतिशील किसान राजेंद्र अटल ने अपने बाग में आम की इस दुर्लभ किस्म को पुनर्जीवित किया है. राजेंद्र अटल पिछले 40 सालों से दुर्लभ और अनोखे पौधे तैयार कर रहे हैं. उनके बाग में सेब, अखरोट, मालटा और चंदन जैसे कई पेड़ मौजूद हैं.
उन्होंने इस आम के पेड़ का नाम ‘सदाबहार वैरायटी’ रखा है क्योंकि इस पर पूरे साल किसी न किसी रूप में आम लटके नजर आते हैं. यह किस्म ग्राफ्टिंग तकनीक और खास देखभाल का नतीजा मानी जा रही है.
इस पेड़ की 5 बड़ी खास बातें |
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| – सालभर फल देता है. |
| – एक साथ बौर, कच्चा और पका आम. |
| – सिर्फ 6–8 फीट ऊंचा. |
| – बेहद मीठे और रसीले फल. |
| – किसानों के लिए गेम-चेंजर |
एक ही समय पर बौर, कच्चा और पका हुआ फल!
इस पेड़ की सबसे हैरान कर देने वाली खासियत यह है कि इसमें एक ही समय पर:
बौर (Mango Blossoms): नए फल आने की शुरुआत.
छोटी अंबी व कच्चे आम: अचार और चटनी के शौकीनों के लिए.
पके हुए सुनहरे आम: खाने के लिए बिल्कुल तैयार मीठे फल.
कैसे चक्र चलता है?
किसान राजेंद्र अटल के मुताबिक, इस पेड़ पर एक खेप के आम पकते हैं, तो दूसरी खेप तुरंत तैयार होने लगती है. यही वजह है कि साल के किसी भी महीने में इस पेड़ पर आम का पूरा लाइफ साइकिल एक साथ देखा जा सकता है.
सिर्फ 6 से 8 फीट है ऊंचाई
आमतौर पर आम के पेड़ काफी विशालकाय होते हैं, लेकिन इस ‘सदाबहार’ पेड़ की ऊंचाई महज 6 से 8 फीट है. छोटा कद होने के बावजूद इस पर भारी मात्रा में फल आते हैं. फल इतने रसीले और स्वादिष्ट होते हैं कि इन्हें गिलहरियों और पक्षियों से बचाने के लिए किसान को स्पेशल थैले (Bags) लगाने पड़ते हैं. पकने पर इस आम का रंग एकदम सुनहरा पीला हो जाता है और यह बेहद मीठा होता है.
किसानों की बदल सकती है किस्मत
राजेंद्र अटल का मानना है कि अगर आम की इस ‘सदाबहार किस्म’ को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से लगाया जाए, तो यह भारतीय किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है.
किसानों को फायदा: सालभर आम की सप्लाई होने से बाजार में हमेशा अच्छी कीमत मिलेगी.
आम प्रेमियों के लिए तोहफा: लोगों को गर्मियों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे साल के 365 दिन ताजे आम का स्वाद ले सकेंगे.
अगर यह ‘सदाबहार आम’ बड़े स्तर पर उगाया गया, तो ना सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ सकती है, बल्कि आम प्रेमियों के लिए ‘हर मौसम आम’ का सपना भी सच हो सकता है.
लेखक के बारे में
अनिता शर्मा
एसोसिएट एडिटर
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