होर्मुज से 5 दिनों में गुजरे 163 जहाज, समुद्री सुरक्षा पर अब भी मंडरा रहा खतरा: Kpler रिपोर्ट | Strait of Hormuz Shipping Update 163 Cargo Ships Pass but Kpler Warns Situation Not Normal

होर्मुज से 5 दिनों में गुजरे 163 जहाज, समुद्री सुरक्षा पर अब भी मंडरा रहा खतरा: Kpler रिपोर्ट | Strait of Hormuz Shipping Update 163 Cargo Ships Pass but Kpler Warns Situation Not Normal होर्मुज से 5 दिनों में गुजरे 163 जहाज, समुद्री सुरक्षा पर अब भी मंडरा रहा खतरा: Kpler रिपोर्ट | Strait of Hormuz Shipping Update 163 Cargo Ships Pass but Kpler Warns Situation Not Normal

मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल-गैस और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में तेजी से सुधार हो रहा है. होर्मुज से 23 जून को 31 जहाजों ने इस एनर्जी चोकपॉइंट को क्रॉस किया.

डील होने के बाद बड़ी जहाजों की आवाजाही

ग्लोबल शिप ट्रैकिंग एजेंसी Kpler ने बुधवार को जारी अपने ताजा रिपोर्ट में कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही में सावधानी के साथ सुधार हो रहा है. 23 जून को होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही जारी रही. कमर्शियल और एनर्जी से जुड़े 31 जहाज यहां से गुजरे. ज्यादातर जहाज पश्चिम से पूर्व की ओर गए. ईरान, ओमान और IMO के सभी रूट इस्तेमाल किये जा रहे हैं. अमेरिका-ईरान MoU के तहत यह जलमार्ग चालू लग रहा है, लेकिन ‘डार्क-रूट’ पर होने वाली गतिविधियों और 60 दिन की समय-सीमा के बाद की अनिश्चितता के कारण सुधार की गति धीमी और सतर्क बनी हुई है.’

जिन 31 जहाजों ने स्ट्रेट ऑ होर्मुज को क्रॉस किया उनमें कच्चे तेल वाहक, केमिकल टैंकर्स, बल्क और आम कार्गो वाले जहाज शामिल थे. इनमें 3 मंजूरी वाले जहाज भी थे.

रिपोर्ट में क्या-क्या?

Kpler ने अपने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 12 से 14 जून के बीच सिर्फ 32 कार्गो जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पास किया था. लेकिन करीब एक हफ्ते बाद 19 से 21 जून के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्रॉस करने वाले कार्गो जहाजों की संख्या 61 बढ़कर 93 तक पहुंच गई. 22 जून को 39 कार्गो जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को क्रॉस किया, जबकि मंगलवार 23 जून को इनकी संख्या 31 दर्ज की गई. यानी 19 से 23 जून के बीच 163 कार्गो जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर लिया.

हालांकि ये युद्ध शुरू होने के पहले वाले स्तर से काफी कम है. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज से औसतन एक दिन में 120 से 140 कार्गो जहाज गुजरते थे. सबसे बड़ा बदलाव पिछले शनिवार को आया, जब हफ्ते-दर-हफ्ते जहाजों के गुजरने की संख्या 3 से बढ़कर 42 हो गई.

ग्लोबल शिप ट्रैकिंग एजेंसी Kpler के मुताबिक, ‘इन आकड़ों से पता चलता है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक से जहाजों की आवाजाही में तेजी से सुधार हुआ है. OFAC के एक अस्थायी जनरल लाइसेंस ने इस आवाजाही को फिर से शुरू करने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे 21 अगस्त तक मंजूरी प्राप्त होर्मुज ट्रांजिट से जुड़ी अनुपालन संबंधी अनिश्चितता कुछ कम हुई है.’

कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में सुधार

तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही में सुधार से अन्तर्राष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में सुधार हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में अच्छी गिरावट देखी जा रही है. बुधवार को ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 3% तक गिरकर 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत भी सस्ती हो गई है.

पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एनालिसिस सेल की 24 जून को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 23 जून 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत गिरकर 74.34/bbl पहुंच गई. इसकी वजह से जून के पहले 23 दिनों के दौरान कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत भी घटकर अमेरिकी डॉलर 87.28/bbl हो गई है.

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल, 50% LNG और 60% LPG दुनियाभर के बाजारों से आयात करता है, जिसका मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता था. लेकिन 28 फरवरी 2026 को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद करीब 103 दिनों तक ग्लोबल मार्केट्स में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई.

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