मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ती जंग ने दुनिया भर की सप्लाई चेन को हिला दिया है. लेकिन इस संकट के बीच सरकार के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आने वाली खरीफ सीजन के लिए भारत के पास खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे खेती और फसलों पर युद्ध का कोई असर नहीं होगा.
खरीफ सीजन के लिए खाद का स्टॉक मौजूद
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास 2026 के खरीफ सीजन के लिए खाद का स्टॉक मौजूद है. इस साल खाद की स्थिति पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है. यूरिया के लिए देश के पास 62 लाख टन स्टॉक है, जो पिछले साल से 10 लाख टन ज्यादा है. वहीं, डीएपी का स्टॉक 25 लाख टन है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है. इसके अलावा एनपीके का स्टॉक पिछले साल 31 लाख टन था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 56 लाख टन हो गया है.
सरकार ने खेती के लिए खाद की कमी ना हो, इसके लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं, जिसमें शामिल हैं-
- खाद बनाने के लिए गैस की जरूरत होती है. सरकार ने एक विशेष कमेटी एम्पावर्ड पूल मैनेजमेंट कमेटी (EPMC) को बाजार से गैस खरीदने की इजाजत दे दी है. सरकारी कंपनी GAIL मंगलवार तक गैस खरीदने का पहला काम पूरा कर लेगी.
- युद्ध और समुद्री रास्तों की दिक्कतों के बावजूद रूस से खाद की सप्लाई लगातार मिल रही है. अब जहाज केप ऑफ गुड होप का इस्तेमाल कर रहे हैं.
- भारत का सऊदी अरब के साथ 5 साल का एक समझौता है, जिसके तहत वहां से DAP खाद लगातार आती रहेगी. इसमें कोई रुकावट नहीं आई है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन कदमों से खरीफ की फसल के लिए फर्टिलाइजर का पर्याप्त स्टॉक रहने की उम्मीद है, खासकर 15 मई से शुरू होने वाली भारी मांग से पहले. हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि मानसून समय पर और सामान्य रहे. इसके अलावा अधिकारी देश के 652 जिलों में खाद की बिक्री पर पैनी नजर रख रहे हैं, जिसके लिए एक सिस्टम बनाया गया है जो खाद की जमाखोरी या कालाबाजारी रोकने के लिए किसी भी गड़बड़ या असामान्य बिक्री को तुरंत पकड़ लेगा.


