Vedanta Demerger: 5 नई कंपनियों में बंटने जा रही अनिल अग्रवाल की दिग्गज कंपनी,1 शेयर के बदले मिलेंगे 6 शेयर! जानें निवेशकों की कैसे खुलेगी किस्मत

Vedanta Demerger: 5 नई कंपनियों में बंटने जा रही अनिल अग्रवाल की दिग्गज कंपनी,1 शेयर के बदले मिलेंगे 6 शेयर! जानें निवेशकों की कैसे खुलेगी किस्मत Vedanta Demerger: 5 नई कंपनियों में बंटने जा रही अनिल अग्रवाल की दिग्गज कंपनी,1 शेयर के बदले मिलेंगे 6 शेयर! जानें निवेशकों की कैसे खुलेगी किस्मत

नई दिल्ली:

अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं, तो आपके लिए वेदांता (Vedanta Ltd) से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर है. भारत की दिग्गज माइनिंग और मेटल सेक्टर की कंपनी वेदांता के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने पुष्टि कर दी है कि वेदांता का बड़ा डीमर्जर (Demerger) होने जा रहा है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के बाद वेदांता पांच नई लिस्टेड कंपनियों में बंटने जा रही है. इस फैसले के बाद, वेदांता के पास अब अपना हर बिजनेस तेल, एल्युमीनियम, जिंक आदि चलाने के लिए अलग और इंडिपेंडेंट कंपनियां होंगी. 

सबसे अच्छी बात यह है कि इस डीमर्जर का सीधा फायदा उन निवेशकों को होगा जिनके पास वेदांता के शेयर हैं.निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि उनके पास मौजूद हर 1 शेयर के बदले अब कुल 6 शेयर हो जाएंगे.

कौन सी 5 नई कंपनियां बाजार में उतरेंगी?

वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के मुताबिक, वेदांता के अलग-अलग बिजनेस को आसान बनाने के लिए इसे 5 स्वतंत्र कंपनियों में बांटा जा रहा है ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें…

  • वेदांता एल्युमीनियम: एल्युमीनियम का पूरा कारोबार संभालेगी.
  • वेदांता ऑयल एंड गैस: तेल और गैस सेक्टर का काम देखेगी.
  • वेदांता स्टील एंड फेरस: लोहे और स्टील बिजनेस की देखरेख करेगी.
  • वेदांता बेस मेटल्स: कॉपर और जिंक  जैसे बेस मेटल्स के कारोबार पर फोकस करेगी.
  • वेदांता पावर : यह बिजली उत्पादन (Power Generation) का काम संभालेगी.

वहीं, पुरानी कंपनी वेदांता लिमिटेड मुख्य रूप से निवेश और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के नए बिजनेस पर फोकस करेगी.

क्यों लिया गया वेदांता डीमर्जर का फैसला? 

वेदांता ने यह कदम अपने ऊपर से भारी कर्ज को कम करने के लिए उठाया है.वेदांता ग्रुप पर इस वक्त कर्ज का भारी बोझ है. दिसंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर लगभग ₹60,624 करोड़ का कर्ज है.अनिल अग्रवाल का लक्ष्य अगले तीन सालों में इस कर्ज को 3 अरब डॉलर कम करना है.

कैसे होगा फायदा? 

कंपनियां अलग होने से उनकी मार्केट वैल्यू बढ़ेगी. इससे जरूरत पड़ने पर किसी खास यूनिट में हिस्सेदारी बेचकर कर्ज चुकाना आसान होगा. साथ ही हर कंपनी का अपना मैनेजमेंट और बोर्ड होगा, जिससे काम में तेजी आएगी और मुनाफा बढ़ेगा. अनिल अग्रवाल का मानना है कि इन पांचों कंपनियों का कुल मार्केट कैप मौजूदा $27 बिलियन से कहीं ज्यादा होगा.

CEO अनिल अग्रवाल का कहना है कि इस कदम से सभी नई यूनिट्स को आगे बढ़ने की पूरी आजादी मिलेगी. अभी तेल, गैस, जिंक और पावर जैसे अलग-अलग सेक्टर एक ही छत के नीचे थे, लेकिन अब हर सेक्टर की अपनी अलग पहचान होगी. इससे निवेशकों को भी यह चुनने का मौका मिलेगा कि वे वेदांता के किस खास बिजनेस जैसे सिर्फ ऑयल या सिर्फ पावर में पैसा लगाना चाहते हैं.

1 शेयर के बदले 6 शेयर: निवेशकों की चांदी

वेदांता के डीमर्जर से निवेशकों की लॉटरी लगने वाली है. कंपनी के प्लान के मुताबिक,अगर आपके पास अभी वेदांता लिमिटेड का 1 शेयर है, तो डीमर्जर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपके पोर्टफोलियो में कुल 6 शेयर हो जाएंगे.आपको पुरानी कंपनी वेदांता लिमिटेड का शेयर तो मिलेगा ही, साथ ही 5 नई बनने वाली कंपनियों के शेयर भी बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे. इसके लिए आपको अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च नहीं करना होगा.





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