Vegetable Cultivation in summer: मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक युवा किसान ने अपनी अनोखी खेती तकनीक से सबको चौंका दिया है.आमतौर पर सर्दियों में उगने वाली सब्जियों को अब वह मई-जून की भीषण गर्मी में भी सफलतापूर्वक उगा रहे हैं. इस नवाचार के जरिए न केवल खेती की लागत कम हो रही है बल्कि किसानों के लिए लाखों रुपए कमाने का रास्ता भी खुल रहा है.
फार्म हाउस में अनोखा प्रयोग
दरअसल सागर निवासी युवा किसान आकाश चौरसिया ने अपने फार्म हाउस पर एक अनोखा प्रयोग किया है. उन्होंने खेत में बांस और बल्लियों की मदद से एक खास तरह का स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसके ऊपर प्राकृतिक रूप से उगने वाली वीट ग्रास (खरपतवार) को फैलाकर जाल जैसा बना दिया गया है. इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें किसी महंगे उपकरण या रसायन की जरूरत नहीं पड़ती.
आकाश चौरसिया बताते हैं कि वीट ग्रास आमतौर पर खेतों में अपने आप उग जाती है और यह खरपतवार को भी नियंत्रित करने का काम करती है. लेकिन आजकल किसान इसे खत्म करने के लिए रासायनिक दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ती है और जमीन की उर्वरता पर भी बुरा असर पड़ता है. उनका मानना है कि यही रसायन फसलों के जरिए हमारे शरीर तक पहुंचते हैं और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं.
ब्रोकली, गोभी और शिमला मिर्च की खेती
इसी सोच के साथ उन्होंने खेत में उगने वाली वीट ग्रास को खत्म करने के बजाय प्राकृतिक रूप से बढ़ने दिया. बाद में उसे सुखाकर बांस-बल्लियों से बने स्ट्रक्चर के ऊपर बिछा दिया. इस स्ट्रक्चर के नीचे उन्होंने ब्रोकली, गोभी और शिमला मिर्च जैसी सर्दियों में उगने वाली सब्जियों की खेती शुरू की है.
सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रिप सिस्टम लगाया है. जब ड्रिप से पानी की हल्की बूंदें ऊपर फैली वीट ग्रास पर गिरती हैं तो उससे नमी पैदा होती है. बाहर का तापमान भले ही 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, लेकिन इस प्राकृतिक जुगाड़ से बने ढांचे के अंदर तापमान लगभग 25 से 30 डिग्री तक बना रहता है. यही तापमान सर्दियों की सब्जियों के लिए अनुकूल होता है.

युवा किसान आकाश चौरसिया ने बताया, कितना होगा लाभ?
आकाश बताते हैं कि इस तकनीक से किसान बिना ज्यादा खर्च के गर्मियों में भी सर्दियों वाली सब्जियां उगा सकते हैं. खास बात यह है कि सर्दियों में जिन सब्जियों के दाम 5 से 10 रुपये किलो होते हैं, वही सब्जियां गर्मियों में 40 से 50 रुपये किलो तक बिकती हैं. ऐसे में किसान इस तकनीक को अपनाकर कम लागत में अच्छी पैदावार के साथ लाखों रुपए तक की कमाई कर सकते हैं.
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