India GDP growth 2026: मिडिल ईस्ट के टेंशन के चलते दुनिया के कई देशों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है. ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है. लेकिन भारत को देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी.अनंत नागेश्वरन ने गुड न्यूज दी है. उन्होंने कहा कि इन सब परेशानियों के बाद भी देशी की अर्थव्यवस्था मजबूत रहेगी. उनके अनुसार आने वाले समय में भारत की जीडीपी 7 फीसदी से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ती रहेगी.
विदेशी निवेशकों पर भरोसा बरकरार
हालांकि वी.अनंत नागेश्वरन के अनुसार, अगर आयात महंगा होता है और विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से आने वाला पैसा कम हुआ तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है. फिलहाल FY26 में ये GDP के 1% से कम रहने का अनुमान है, लेकिन FY27 में 2% तक बढ़ सकता है. इसके बाद भी राहत की बात ये है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत पर बना हुआ है. FY26 में भारत को करीब 90 से 95 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिल सकता है. दूसरी तरफ भारत तेजी से एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है, जिससे कई विदेशी कंपनियां यहां निवेश के लिए आना चाहती हैं.
कच्चे तेल और सप्लाई चेन पर नजर
कच्चे तेल की कीमतें लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं. इस पर CEA नागेश्वरन ने कहा कि मिडिल ईस्ट का संकट ऐसे समय में आया है, जब हमारे देश की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है. सरकार की नजर कच्चे तेल की सप्लाई और ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमत पर लगातार बनी हुई हैं.
महंगाई पर राहत के संकेत
महंगाई को लेकर वी.अनंत नागेश्वरन ने कहा कि महंगाई के मौर्चे पर थोड़ी राहत दिख रही है. अब कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा धीरे‑धीरे कम रहा है. लेकिन मौसम की वजह से थोड़ी परेशानी हो सकती है. उन्होंने राज्यों के कामों की तारीफ करते हुए कहा कि 23 बड़े सेक्टर्स में नियमों को आसान बनाने के करीब 86% काम पूरे हो चुके हैं.
प्राइवेट सेक्टर की कंपनी से की अपील
CEA वी.अनंत नागेश्वरन ने बताया कि कंपनियां आजकल अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. लेकिन उतना पैसा नए कामों या प्रोजेक्ट्स में नहीं लगा रही हैं. इससे पता चलता है कि कंपनियां अभी बड़े निवेश करने में हिचक रही हैं. देश को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि कंपनियां ज्यादा निवेश करें.


