ईरान के साथ क्रूड ऑयल सप्‍लाई पर डील कर सकता है भारत! तेल-गैस संकट के बीच चीन समेत तीन और देश कतार में

ईरान के साथ क्रूड ऑयल सप्‍लाई पर डील कर सकता है भारत! तेल-गैस संकट के बीच चीन समेत तीन और देश कतार में ईरान के साथ क्रूड ऑयल सप्‍लाई पर डील कर सकता है भारत! तेल-गैस संकट के बीच चीन समेत तीन और देश कतार में

India Iran Crude Oil Deal: मिडिल ईस्‍ट में चल रहे तनाव के चलते होर्मुज संकट के बीच अनुमान जताया गया है कि कच्‍चे तेल की सप्‍लाई (Crude Oil Supply) पर भारत, ईरान के साथ डील कर सकता है. ये अनुमान है, रेटिंग एजेंसी मूडीज. एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है और ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने की उम्मीद भी फिलहाल नहीं दिख रही है. अपनी जियो-पॉलिटिकल रिस्‍क संबंधी ग्‍लोबल रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही धीरे-धीरे सुधर सकती है, लेकिन यह सामान्य तरीके से नहीं बल्कि द्विपक्षीय समझौतों के जरिये होगी.

चीन समेत तीन और देश कर सकते हैं डील

मूडीज ने कहा कि भारत के अलावा चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तेल आयातक देश भी ईरान के साथ अलग-अलग स्तर पर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकते हैं. मूडीज के अनुसार, लारक द्वीप और ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास कुछ कॉरिडोर उभर रहे हैं, लेकिन 2026 में भी संघर्ष-पूर्व स्तर की आवाजाही बहाल होना मुश्किल दिखता है. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अगले छह महीनों में होर्मुज स्‍ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू भी हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार आपूर्ति संकट से जूझता रहेगा. इससे ऊर्जा कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा और लागत, मांग के साथ-साथ वित्तीय परिस्थितियों पर असर पड़ेगा.

90-110 डॉलर के बीच रह सकती हैं कच्‍चे तेल की कीमतें 

मूडीज़ ने अनुमान जताया कि इस वर्ष ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं. हालांकि, नए भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते कीमतों में इससे बाहर भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

एजेंसी के मुताबिक, यदि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 90-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं तो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है.

भारत सबसे ज्‍यादा प्रभावित देशा में 

मूडीज ने कहा कि भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है क्योंकि उसके करीब 46 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात पश्चिम एशिया से होता है. ऊंची तेल कीमतों से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और चालू खाते के घाटे (CAD) और राजकोषीय प्रबंधन पर असर पड़ सकता है.

एजेंसी ने मई के अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत अंक घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है.

संघर्ष से 90 फीसदी गिरा समुद्री ट्रैफिक 

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष अब तीसरे महीने में पहुंच गया है. इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा आता था.

रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के बाद इस मार्ग से समुद्री यातायात में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है. बीमा लागत बढ़ने, सुरक्षा जोखिम और समुद्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी के कारण पोत परिवहन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. वहीं ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच व्यापक उतार-चढ़ाव देख चुकी हैं.

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