एक साथ डोली दो देशों की धरती, वेनेजुएला में 7.5 के भूकंप के बाद गिरी इमारतें, जापान में 6.9 से थर्रायी जमीन | Major Earthquakes strike Venezuela and Japan causing buildings to collapse and damage Death Toll Updates

वेनेजुएला में भूकंप आने के बाद भागते लोग (फोटो- एएफपी) एक साथ डोली दो देशों की धरती, वेनेजुएला में 7.5 के भूकंप के बाद गिरी इमारतें, जापान में 6.9 से थर्रायी जमीन | Major Earthquakes strike Venezuela and Japan causing buildings to collapse and damage Death Toll Updates


Earthquakes hit Venezuela, Japan cause Building Collapse: एक साथ दो देश बहुत बड़े भूकंप से थर्रा गए हैं. जहां वेनेजुएला में लगभग एक मिनट के गैप में दो जबरदस्त भूकंप आए, जिससे राजधानी काराकस में इमारतें ढह गईं और नुकसान हुआ. रिक्टर स्केल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले ये लगातार आए भूकंप, पिछले सौ से ज्यादा सालों में देश में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से हैं. वहीं दूसरी तरफ जापान में भी शक्तिशाली भूंकप आया है. जापान में रिक्टर स्केल पर 6.9 का भूकंप आया है. 

वेनेजुएला में 22 मंजिला बिल्डिंग तक गिरी

बुधवार की शाम (स्थानीय समयानुसार) वेनेजुएला के एक ही इलाके में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और एएफपी के पत्रकारों के अनुसार, इन झटकों से कई इमारतें गिर गईं. भूकंप के कारण यहां की राजधानी कराकास में अफरा-तफरी मच गई और लोग डरकर सड़कों पर निकल आए. खबर लिखे जाने तक अभी यह साफ नहीं था कि किसी की मौत हुई है या नहीं, लेकिन देश गृह मंत्री दियोसदादो काबेलो ने कहा कि कुछ इमारतें गिर गईं और कई घरों की छतों के हिस्से टूटकर गिर पड़े.

वेनेजुएला में भूकंप आने के बाद भागते लोग (फोटो- एएफपी)

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार कराकास में रहने वाली 54 साल के बैंक कर्मचारी ओडालिस एस्कालोना ने कहा, “सीढ़ियां टूट गईं, पूरी दीवार में दरार पड़ गई. छत से सामान गिरने लगा. यह बहुत डरावना था.”

एएफपी के एक पत्रकार ने देखा कि कराकास के अल्तामीरा इलाके में 22 मंजिला एक इमारत पूरी तरह तबाह हो गई. मलबे के बाहर खड़े लोग अपने रिश्तेदारों के नाम पुकार रहे थे, जबकि वॉलंटियर्स मलबे पर चढ़कर लोगों को खोजने की कोशिश कर रहे थे. USGS के अनुसार, पहले भूकंप का केंद्र समुद्र तट के पास स्थित मोरोन शहर से 21 किलोमीटर पश्चिम में था. इसके एक मिनट के भीतर ही करीब 45 किलोमीटर दूर 7.5 तीव्रता का दूसरा भूकंप आ गया.

देश के गृह मंत्री काबेलो ने लोगों से अपने घरों से बाहर निकलने को कहा. उन्होंने यह भी बताया कि एहतियात के तौर पर कई इमारतों में गैस की आपूर्ति बंद कर दी गई है. उन्होंने कहा, “कुछ इमारतों को नुकसान पहुंचा है और हम नहीं चाहते कि गैस से जुड़ा कोई हादसा हो.”

दूसरा भूकंप जमीन से केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था. एएफपी के एक पत्रकार ने देखा कि इसके बाद कराकास के एक शॉपिंग मॉल में लोग घबराकर चीखने लगे. पहला भूकंप 22 किलोमीटर की गहराई पर आया था.

जापान में 6.9 का भूकंप, सुनामी की चेतावनी नहीं

उत्तरी जापान में भी 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है. जापान की मौसम एजेंसी ने इसकी जानकारी दी. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के झटके राजधानी टोक्यो में भी महसूस किए गए, जो घटना स्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर है. हालांकि अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी के घायल होने या मौत की खबर नहीं है और सुनामी की चेतावनी भी जारी नहीं की गई.

भूकंप के बाद बड़े नुकसान की तुरंत कोई खबर नहीं मिली, लेकिन इवाते प्रांत के समुद्र तट के पास भूकंप आने के बाद कुछ शिंकान्सेन बुलेट ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गईं. जापान मौसम एजेंसी (जेएमए) के अनुसार, भूकंप जमीन से लगभग 50 किलोमीटर नीचे आया था. सरकारी टीवी चैनल एनएचके के फुटेज में हाचिनोहे शहर में सामान्य ट्रैफिक चलता हुआ दिखाई दिया. ट्रैफिक सिग्नल भी सामान्य रूप से काम कर रहे थे.

एनएचके के अनुसार, उत्तरी द्वीप होक्काइडो में स्थित तोमारी परमाणु संयंत्र (न्यूक्लियर प्लांट) से जुड़े रेडिएशन निगरानी केंद्रों पर कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया. प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सभी मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करने का आदेश दिया. उन्होंने एक्स पर कहा, “जिन इलाकों में तेज झटके महसूस हुए हैं, वहां के लोग सतर्क रहें, क्योंकि इसी तरह के और भूकंप आने की संभावना हो सकती है.”

बता दें कि जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है. यह प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ नामक क्षेत्र में स्थित है, जहां चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं. करीब 12.5 करोड़ आबादी वाले जापान में हर साल सैकड़ों भूकंप आते हैं. दुनिया के लगभग 18 प्रतिशत भूकंप जापान और उसके आसपास के इलाकों में आते हैं. इनमें से ज्यादातर भूकंप हल्के होते हैं, लेकिन नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि भूकंप कहां आया और जमीन के कितने नीचे आया.

जापान आज भी 2011 की बड़ी त्रासदी को नहीं भूला है. उस साल समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसके बाद सुनामी आई थी. इस आपदा में करीब 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे, और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा था.

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