ग्राम प्रधानों का 1 साल बढ़ेगा कार्यकाल! यूपी पंचायत चुनाव टलने से प्रशासकीय समिति को मिल सकती है जिम्मेदारी

ग्राम प्रधानों का 1 साल बढ़ेगा कार्यकाल! यूपी पंचायत चुनाव टलने से प्रशासकीय समिति को मिल सकती है जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों का 1 साल बढ़ेगा कार्यकाल! यूपी पंचायत चुनाव टलने से प्रशासकीय समिति को मिल सकती है जिम्मेदारी

लखनऊ:

UP Panchayat Election Date: यूपी पंचायत चुनाव समय से होने की उम्मीदें टूटने के बीच ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है और तब तक चुनाव होने की कोई उम्मीद नहीं है. 26 मई के उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की कमान प्रशासकीय समिति को सौंपी जा सकती है, जिसमें ग्राम प्रधान और अन्य सदस्य होंगे. ग्राम पंचायतों में सीधे प्रशासक के तौर पर अफसर नहीं बैठाए जाएंगे. पंचायती राज कानून के तहत, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 5 साल होने और चुनाव समय पर न हो पाने की स्थिति में अलग व्यवस्था है.

यूपी पंचायतों का कार्यकाल 

सामान्यतया हर ग्राम पंचायत में एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी दी जाती है. लेकिन दूसरा तरीका यह भी है कि प्रशासकीय समिति के जरिये ज्यादा लोकतांत्रिक तरीके से पंचायतों का कामकाज चलाया जाए. इस कमेटी में ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य के अलावा प्रशासन के अधिकारी भी होते हैं. ऐसे में इस विकल्प की संभावना है, ताकि ग्राम प्रधानों में नाराजगी भी न पैदा हो. 

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल क्या बढ़ेगा

प्रशासकीय समिति का प्रमुख भी ग्राम प्रधान को बनाया जा सकता है. यूपी पंचायत चुनाव होने तक ग्राम प्रधान की अगुवाई में ये कमेटी ही सारे कामकाज निपटाती है. पंचायतों में नई व्यवस्था 26 मई 2026 के पहले ही लागू हो जाएगी. पंचायती राज मंत्रालय भी इस पर विचार कर रहा है. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट चुनाव टलने पर क्या रुख अपनाता है, ये देखना होगा. 23 अप्रैल को हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई टल गई थी. हाईकोर्ट चुनाव में हीलाहवाली को लेकर चुनाव आयोग से कड़े सवाल पूछ चुका है.

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यूपी पंचायत चुनाव कब होंगे

यूपी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची अब 10 जून को आएगी, जो पहले 22 अप्रैल को प्रकाशित होनी थी. फाइनल वोटर लिस्ट के कंप्यूटराइजेशन, मतदान स्थलों की मैपिंग, वार्डों का विवरण भी तय नहीं हो पाया है. 

यूपी पंचायत चुनाव की तैयारी में देरी

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरकार की ओर से अभी पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है. ओबीसी कमीशन के बिना पंचायतों में आरक्षण लागू कर पाना संभव नहीं है. पंचायत चुनाव आरक्षण के बिना मुमकिन नहीं है. आयोग को सभी 75 जिलों में आरक्षण के लिए कई महीनों का समय लग सकता है. ऐसे में पंचायत इलेक्शन विधानसभा चुनाव तक भी टल सकते हैं. गुटबाजी, रंजिश और पारिवारिक फूट के कारण भी सरकारें विधानसभा चुनाव के साल में पंचायत चुनाव कराने से हिचकती हैं. 

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ग्राम प्रधानों की मांग

पंचायत चुनाव में देरी को लेकर ग्राम प्रधानों के संगठन ने भी आवाज उठा दी है. पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि अगर समय से चुनाव सरकार नहीं करा पाती है तो फिर ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए. उनका तर्क यह भी है कि मौजूदा कार्यकाल कोरोना के कारण काफी प्रभावित रहा, उन्हें कामकाज का ठीक से मौका नहीं मिला. ऐसे में उन्हें देरी होने पर अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाए. 





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