जब एक वायरल वीडियो के चलते सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की नौबत आ गई थी… जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

जब एक वायरल वीडियो के चलते सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की नौबत आ गई थी... जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी जब एक वायरल वीडियो के चलते सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की नौबत आ गई थी... जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

Vaishali Elderly Man Case: देश की राजधानी दिल्ली से लेकर बिहार के वैशाली तक मंगलवार को एक ऐसी कानूनी हलचल देखने को मिली, जिसने न्याय व्यवस्था की रफ्तार और संवेदनशीलता दोनों पर एक साथ बड़े सवाल खड़े कर दिए. सोशल मीडिया पर मंगलावार दोपहर बिहार के वैशाली जिले का एक वीडियो जमकर वायरल हुआ. इस वीडियो में  85 साल के एक लाचार बुजुर्ग, जो ठीक से चल-फिर भी नहीं सकते थे, हाथ में डंडा और चप्पल लिए कोर्ट परिसर से बाहर निकलते दिखे. खबर आई कि वैशाली की एक निचली अदालत ने 34 साल पुराने मामले में इस बुजुर्ग को 3 साल की सजा सुनाई है.

CJI ने बुजुर्ग की सजा सुनते ही खुलवाए कोर्ट के ताले

बुजुर्ग की सजा के वीडियो के वायरल होने के कुछ देर बाद ही वैशाली से करीब 1,067 किमी दूर दिल्ली में  सुप्रीम कोर्ट के भीतर अचानक दोपहर में हलचलें तेज हो गई. सूत्रों ने NDTV को बताया कि रजिस्ट्री ने सुरक्षाकर्मियों को करीब दोपहर 2.40 बजे पर कोर्ट नंबर 1, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का कोर्टरूम है, उसे खोलने के लिए कहा. अदालत तुरंत खोली गई, और मामले को सूचीबद्ध करने की तैयारियां शुरू हो गईं. हालांकि, शाम 4 बजे तक कोर्टरूम को फिर से बंद कर दिया गया.

अब सब सोचेंगे कि इन दोनों घटनाओं का आपस में क्या संबंध है ?

 NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक ये खबर CJI सूर्यकांत तक पहुंची थी. उस समय CJI  दो अन्य वरिष्ठ जजों के साथ हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की मीटिंग कर रहे थे. इसी दौरान CJI ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वो इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई करना चाहते हैं. इसके अलावा उन्होंने पटना हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल से केस संबंधी रिपोर्ट भी मांगी. 

कॉलेजियम की मीटिंग छोड़ CJI ने लिया स्वत: संज्ञान

 इस वजह से CJI ने कोर्ट के ताले खुलवाते हुए रजिस्ट्री से केस को लिस्ट करने की तैयारी शुरू करने के लिए कहा. रजिस्ट्री के टॉप सूत्रों ने बताया कि हाई कोर्ट से मिली रिपोर्ट में कहा गया है कि वैशाली की निचली अदालत ने खुद ही बुजुर्ग व्यक्ति को अपील फाइल करने के लिए बेल दे दी थी. जब CJI को इस बारे में बताया गया तो उन्होंने कोर्ट को फिर से लॉक करवा दिया.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में अभी  आंशिक कार्य दिवस  हैं जिसके चलते मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कोर्ट में अभी काम नहीं हो रहा है. CJI ने सुबह ही पांच नए जजों को शपथ दिलाई थी और फिर दोपहर में उन्होंने हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम मीटिंग शुरू की थी.

क्या है 34 साल पुराना यह पूरा मामला?

 ये पूरा मामला वैशाली के राघोपुर के जुड़ावनपुर का है, जहां 34 साल पुराने जानलेवा हमले में अदालत ने  फैसला सुनाते हुए बुजुर्ग को दोषी करार दिया.
घटना 1992 की है, जहां आपसी झगड़े में एक ही परिवार के 9 लोगों पर एक दंपति पर फायरिंग और जानलेवा हमला करने का केस दर्ज हुआ था. हालांकि, केस की सुनवाई के दौरान ही 9 में से 4 की मौत हो गई, जबकि 5 आरोपी अभी भी जिंदा हैं. इनमें से एक दीप राय उर्फ जीसा राय है. 85 साल के दीप राय को 3 साल और बाकी 4 लोगों को 10 साल की कैद और 25000 रुपये का जुर्माना लगाया गया.

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