दूरदर्शन का वो शो, जिसके थे 780 एपिसोड, 90s में सीरियलों पर पड़ा भारी, मां के रेप का बदला लेने निकली थी पत्रकार

दूरदर्शन का वो शो, जिसके थे 780 एपिसोड, 90s में सीरियलों पर पड़ा भारी, मां के रेप का बदला लेने निकली थी पत्रकार दूरदर्शन का वो शो, जिसके थे 780 एपिसोड, 90s में सीरियलों पर पड़ा भारी, मां के रेप का बदला लेने निकली थी पत्रकार

नई दिल्ली:

90 के दशक में टीवी सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं बल्कि पूरे परिवार का साथ बैठने का बहाना हुआ करता था. उस दौर में जब घरों में केबल टीवी नया नया आया था और ज्यादातर लोग अभी भी दूरदर्शन पर भरोसा करते थे. तब एक सीरियल ने हर दोपहर लोगों को टीवी स्क्रीन से बांध दिया था. ये सीरियल था ‘शांति – एक औरत की कहानी’. मंदीरा बेदी का दमदार अंदाज, रहस्य और थ्रिल से भरी कहानी और बदले की आग में जलती एक लड़की का संघर्ष, इस शो को बाकी सीरियल्स से अलग बनाता था. स्कूल से लौटने वाले बच्चे, रसोई का काम निपटा कर फ्री हुई मां और साथ बैठा पूरा परिवार, सब ‘शांति’ का अगला एपिसोड देखने का इंतजार करते थे.

जब ‘शांति’ ने बदल दी टीवी की हीरोइन की डेफिनेशन

1994 में दूरदर्शन पर शुरू हुआ ‘शांति’ इंडियन टीवी का पहला बड़ा डेली सोप माना जाता है. उस समय टीवी पर ज्यादातर महिलाएं सीधी-सादी और चुप रहने वाली दिखाई जाती थीं. लेकिन ‘शांति’ बिल्कुल अलग थी. शो में मंदीरा बेदी ने एक ऐसी पत्रकार का किरदार निभाया जो अपनी मां के साथ हुई नाइंसाफी का बदला लेने निकलती है. वो भी एक रसूखदार परिवार से. कहानी में शांति अपनी मां तुलसी के साथ हुए रेप के पीछे छिपे सच को सामने लाने के लिए एक रईस परिवार में पहुंचती है. वो अपने इंवेस्टिगेशन और हिम्मत के दम पर उन लोगों का सामना करती है जिन्होंने उसकी मां की जिंदगी बर्बाद कर दी थी. यही वजह थी कि हर एपिसोड के बाद दर्शकों के मन में सवाल रहता था कि अब आगे क्या होगा?

पूरा घर बन जाता था थिएटर

‘शांति’ सिर्फ एक टीवी शो नहीं था. बल्कि 90s के बच्चों और परिवारों की यादों का हिस्सा बन गया था. कई घरों में ये सीरियल दोपहर के खाने के साथ देखा जाता था. उस दौर में न मोबाइल था, न ओटीटी प्लेटफॉर्म, इसलिए टीवी का हर शो लोगों के दिल में बस जाता था. करीब 780 एपिसोड वाले इस सीरियल ने मंदीरा बेदी को घर घर में पहचान दिलाई. आज भी 90s के लोग जब दूरदर्शन के पुराने दिनों को याद करते हैं तब ‘शांति’ का नाम जरूर सामने आता है. और, मंदिरा बेदी भी जब जब नजर आती हैं 90’s के किड्स को उनमें शांति की झलक भी दिख ही जाती है.






Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *