नई दिल्ली:
साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय देवरकोंडा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सफलता पाने से पहले विजय ने खुद के लिए डेडलाइन तैयार की थी कि अगर एक निश्चित उम्र तक उन्हें एक्टिंग में पहचान नहीं मिली, तो वह इस सपने को छोड़ देंगे. यही डर और दबाव उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करता रहा और आज वह करोड़ों दिलों पर राज करते हैं. विजय देवरकोंडा का जन्म 9 मई 1989 को हैदराबाद में एक तेलुगू परिवार में हुआ था. उनके पिता गोवर्धन राव टीवी सीरियल्स से जुड़े रहे, जबकि उनकी मां माधवी घर संभालती थीं.
परिवार चाहता था की विजय सुरक्षित नौकरी करें
विजय का बचपन सामान्य परिवार में बीता. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पुट्टपर्थी के बोर्डिंग स्कूल में की. बाद में हैदराबाद से आगे की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद विजय का मन हमेशा फिल्मों और अभिनय की दुनिया में लगता था. परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई के बाद कोई सुरक्षित नौकरी करें, लेकिन विजय ने एक्टिंग को ही अपना सपना बना लिया.
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फ्लॉप फिल्मों के कारण घर पर दो साल तक बैठे विजय देवरकोंडा

साल 2011 में विजय ने फिल्म ‘नुव्विला’ से अपने करियर की शुरुआत की. हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही. इसके बाद वह ‘लाइफ इज ब्यूटीफुल’ में नजर आए, लेकिन यह फिल्म भी उन्हें बड़ी पहचान नहीं दिला सकी. लगातार दो फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद विजय को लंबे समय तक काम नहीं मिला. करीब दो साल तक वह घर पर खाली बैठे रहे. यही वह समय था जब उनके परिवार को उनकी चिंता सताने लगी. घरवाले उन्हें एक्टिंग छोड़कर दूसरी राह चुनने की सलाह देने लगे. उनकी बहन तक उन्हें एमबीए के फॉर्म भेजा करती थीं.
विजय देवरकोंडा ने खुद को दी डेडलाइन

इसी दौरान विजय ने खुद को एक डेडलाइन दी. उन्होंने तय कर लिया था कि अगर एक उम्र तक सफलता नहीं मिली, तो वह फिल्मों का सपना छोड़ देंगे. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह अपने संघर्ष के दिनों को याद भी नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्हें डर लगने लगता है. उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए उन्होंने पूरी ताकत अपने सपने को पूरा करने में लगा दी. किस्मत ने आखिरकार विजय की मेहनत का साथ दिया. साल 2015 में फिल्म ‘येवडे सुब्रमण्यम’ रिलीज हुई, जिसमें उनके काम को काफी पसंद किया गया.
विजय देवरकोंडा का हिट करियर हुआ शुरू

इसके बाद साल 2016 में आई ‘पेल्ली चोपुलु’ ने उनकी जिंदगी बदल दी. कम बजट में बनी यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और विजय को बतौर लीड एक्टर पहचान मिल गई, लेकिन असली स्टारडम उन्हें साल 2017 की फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ से मिला. इस फिल्म में उन्होंने एक गुस्सैल और दिल टूटे हुए सर्जन का किरदार निभाया था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया और विजय रातोंरात सुपरस्टार बन गए.
अर्जुन रेड्डी से चमकी किस्मत
‘अर्जुन रेड्डी’ के लिए विजय को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इसके बाद उन्होंने ‘गीता गोविंदम’, ‘महानति’, ‘टैक्सीवाला’ और ‘डियर कॉमरेड’ जैसी फिल्मों में काम किया. उनकी फिल्मों को युवाओं ने खूब पसंद किया. उन्होंने बॉलीवुड में भी डेब्यू किया और फिल्म ‘लाइगर’ से दर्शकों के दिलों में जगह पक्की की. सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, विजय ने अपना फैशन ब्रांड ‘राउडी वियर’ भी शुरू किया. इसके अलावा उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई. वह सामाजिक कामों में भी आगे रहते हैं और कई जरूरतमंद लोगों की मदद कर चुके हैं. कोरोना काल में भी उन्होंने हजारों परिवारों तक सहायता पहुंचाई थी.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


