कोलकाता:
पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण से संबंधित दो अहम विधेयक सोमवार को विधानसभा में पास हो गए. इन विधेयक के पास होने के साथ ही ओबीसी सूची में शामिल 77 मुस्लिम समुदाय ओबीसी आरक्षण से बाहर हो गए हैं. ये मुस्लिम कम्युनिटीज लेफ्ट और तृणमूल सरकार के समय शामिल की गई थीं. नए कानून के तहत, कलकत्ता हाई कोर्ट के मई 2024 के आदेश के अनुसार, कई मुस्लिम कम्युनिटीज को ओबीसी लिस्ट से हटा दिया गया है. इसके अलावा, ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण कोटा 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है, साथ ही OBC वर्गीकरण में भी बदलाव किए गए हैं. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अधिनियम, 1993 में भी संशोधन किया गया है.
TMC ने बिना सर्वे मुस्लिमों को किया था शामिल
पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने बिना किसी सर्वे के सिर्फ मुसलमानों को विशेष लाभ देने के लिए कुछ कम्युनिटीज को ओबीसी लिस्ट में शामिल किया था, जिसे अब हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार रद्द कर दिया गया है. उन्होंने कहा, ‘सर्वे के आधार पर शामिल की गई 66 कम्युनिटीज को बनाए रखा गया है. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग अब ओबीसी कम्युनिटीज की असल सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करेगा. पिछली सरकार ने आयोग को पूरी तरह नजरअंदाज करके कदम उठाए थे. नया कानून नकली ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाने में भी मदद करेगा.’
OBC आरक्षण 10 से घटाकर किया 7%
पिछले साल मई में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद, उसने उन 77 मुस्लिम कम्युनिटीज की मान्यता रद्द कर दी थी, जिन्हें टीएमसी सरकार के दौरान ओबीसी का दर्जा दिया गया था. साथ ही, ओबीसी आरक्षण को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया था. मंत्री गौरी शंकर घोष ने कहा, ‘हमने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि अगर हम सरकार बनाते हैं, तो हम 1993 की मूल ओबीसी सूची को फिर से लागू करेंगे, वो सूची जिसे TMC सरकार ने बिना किसी उचित जांच के रद्द कर दिया था. आज, उस पर हमारा बिल 186 वोटों से पास हो गया और ‘गुंडा दमन’ (असामाजिक गतिविधि) बिल भी पास हुआ. यह एक बेहतरीन बिल है. हमारे मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि अगले महीने, यानी अगस्त में बंगाल में UCC (यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड) लागू किया जाएगा. हमारा मानना है कि UCC लागू होना चाहिए.’
बिल के विरोध में क्या कहा गया?
हालांकि, बंगाल विधानसभा में बिल के विरोध में भी कई विधायक उठे. बिल का विरोध करते हुए आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने विधानसभा में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आरक्षण की सीमा में किसी भी बदलाव के लिए ठोस डेटा या वैज्ञानिक मूल्यांकन की जरूरत होती है. लेकिन राज्य सरकार बिना सही डेटा के ओबीसी आरक्षण को कम करने की दिशा में बढ़ रही है और बिल में इस मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई है.’ सिद्दीकी ने आगे कहा, ‘हमें डर है कि आरक्षण में 7% की कटौती से यह समुदाय उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के मौकों से वंचित रह जाएगा. मंडल कमीशन की सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया है. यह बिल सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा को भी कमज़ोर करेगा.’
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