ईरान के सांसद और संसद में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान को लेकर बड़ी बात की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भले ही हमारा मित्र और अच्छा पड़ोसी है, लेकिन वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है और उसमें मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता का अभाव है.
इब्राहिम रेजाई ने क्या कहा है
इब्राहिम रेजाई ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा, ‘पाकिस्तान हमारा मित्र और अच्छा पड़ोसी है, लेकिन वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है और उसमें मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता का अभाव है. वे हमेशा ट्रंप के हितों को ध्यान में रखते हैं और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं कहते. उदाहरण के लिए, वे दुनिया को यह बताने को तैयार नहीं हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुरू में पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया. वे यह भी नहीं कहते कि अमेरिकियों ने लेबनान या जब्त की गई संपत्तियों के संबंध में प्रतिबद्धताएं जताई थीं, लेकिन उन्हें पूरा करने में विफल रहे. एक मध्यस्थ को तटस्थ होना चाहिए, न कि वह जो लगातार एक पक्ष की ओर झुका रहे.’
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
ईरान को यूरोप से उम्मीदें
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता की तरफ से इस तरह का बयान आना बताता है कि ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता में यकीन नहीं रखता. हां, उसे सीधे-सीधे मना भी नहीं करता. साथ ही उसे अमेरिका पर भी यकीन नहीं है. इस बीच ईरान यूरोप से नजदीकी बढ़ाता दिख रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरोट से रविवार को टेलीफोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध में हुए संघर्ष विराम से संबंधित नवीनतम घटनाक्रमों और चल रहे राजनयिक प्रयासों पर चर्चा की. अराघची ने इस प्रक्रिया में यूरोपीय देशों की रचनात्मक भूमिका के महत्व पर जोर दिया. बैरोट ने भी राजनयिक दृष्टिकोण को जारी रखने के लिए फ्रांस के समर्थन को दोहराया और आशा व्यक्त की कि चल रही वार्ता से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी.
पाकिस्तान को ईरानी विदेश मंत्री ने बताई शर्तें
वहीं पाकिस्तान, ओमान और रूस की अपनी चल रही क्षेत्रीय यात्रा के दौरान, अराघची पाकिस्तानी राजधानी की अपनी पहली यात्रा के एक दिन बाद संक्षिप्त दौरे पर फिर से पाकिस्तान में हैं. तसनीम न्यूज एजेंसी की जानकारी के अनुसार, अराघची पड़ोसी देश के अधिकारियों के साथ अपनी हालिया बातचीत जारी रखने के लिए फिर से पाकिस्तान आए. ईरान से एक प्रतिनिधिमंडल भी आया. तसनीम संवाददाता की जानकारी के अनुसार, “इन वार्ताओं का परमाणु मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है.” द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत के अलावा, अराघची के महत्वपूर्ण एजेंडे में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तानी पक्ष को युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों से अवगत कराना भी शामिल है. अराघची द्वारा उठाए गए मुद्दों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक नई कानूनी व्यवस्था लागू करना, मुआवजा प्राप्त करना, युद्ध भड़काने वालों द्वारा ईरान के खिलाफ आगे कोई सैन्य आक्रामकता न होने का आश्वासन देना और देश के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना शामिल हैं. अब ईरान के विदेश मंत्री रूस रवाना हो चुके हैं और ईरान से आया प्रतिनिधिमंडल अपने देश. वहीं ट्रंप ने भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद से लौटने के बाद फिर धमकी दी है. खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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