आतंकवाद को अपनी नेशनल पॉलिसी का हिस्सा बनाने वाले पड़ोसी देश, आतंकवादियों के पालनहार पाकिस्तान ने फिर औकात से ज्यादा मुंह खोला है. पहलगाम के कायराना आतंकी हमले के बाद से ही भारत ने साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता. भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित कर दिया है. ऐसे में पानी के बूंद के लिए तरसते पाकिस्तान ने एक और गीदड़ भभकी दी है. पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा है कि जो हमारे पानी पर हाथ डालेगा, हम वो हाथ ही काट देंगे.
पाकिस्तानी अखबार जियोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार मुसादिक मलिक ने सोमवार, 29 जून को कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के मुद्दे को केवल दो देशों के बीच के विवाद से आगे ले जा रहा है. पाकिस्तान हताशा में वही करने की कोशिश में है जो वह कश्मीर मुद्दे पर करने की चाहत लिए बैठा है और उसे आजतक सफलता नहीं मिली है- मुद्दे को तीसरे देशों के बीच ले जाना. मुसादिक मलिका का दावा है कि वह सिंधु जल संधि के मुद्दे को न्याय, मौलिक अधिकारों और नदी के बहाव की दिशा में नीचे की ओर स्थित देशों के पानी तक पहुंच की सुरक्षा से जुड़े एक वैश्विक मामले के तौर पर पेश कर रहे हैं.
پاکستان پہلے ہی واضح کر چکا ہے کہ اگر کسی نے ہمارے پانی پر ہاتھ ڈالنے کی کوشش کی تو اسے بھرپور جواب دیا جائے گا
ہم دوٹوک اعلان کر چکے ہیں کہ جو ہمارے پانی پر ہاتھ ڈالے گا ہم وہ ہاتھ کاٹ دیں گے
ہم نے پہلے ہوا میں پکڑ کر ٹھوکا ہے اب نیچے سے بھی ٹھوکیں گے ۔ مصدق ملک pic.twitter.com/l4q4XfmpsN
— Kippsam Malik (@KeepsamM) June 29, 2026
पानी छूट जाए लेकिन इनसे आतंकवाद नहीं छूटगा
मुसादिक मलिक ने सिंधु को एक ऐसा नल बताया “जिसका हैंडल हमारे पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में है, जो कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने दी जाएगी.” मलिक के अनुसार, पाकिस्तान की 40% से 50% आबादी रोजगार के लिए खेती पर निर्भर है, यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में 20% से 25% का योगदान देता है, और पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह से पानी की उपलब्धता पर निर्भर है.
उन्होंने कहा, “हमारी खाद्य सुरक्षा, हमारी अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका इसी पानी से जुड़ी है.” उन्होंने आगे कहा कि नदियों के बहाव पर असर डालने वाले फ़ैसले किसी दूसरे देश के हाथ में नहीं होने चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि अगर ऊपर की तरफ बसे देशों को नीचे की तरफ बसे देशों की ओर जाने वाली नदियों के बहाव को रोकने या उसमें हेर-फेर करने की इजाजत दी जाती है, तो इससे दुनिया भर की नदी प्रणालियों पर असर पड़ेगा.
भारत का स्टैंड क्लियर है
पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था. विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई यह संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे और इस्तेमाल को नियंत्रित करती आ रही है. अब भारत ने साफ किया है कि जबतक पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तबतक पानी नहीं दिया जाएगा. भारत जैसा दिल करे, सिंधु के पानी का इस्तेमाल किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: खतरे में आ जाएगा हमारा दाना-पानी, सिंधु समझौते पर बौखलाया पाकिस्तान अब UNSC पहुंचा


